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बकवा में 6 जनजातीय होम स्टे का शुभारंभ, ग्रामीण पर्यटन और स्वरोजगार को मिली नई उड़ान

सीधी(ईन्यूज एमपी)-मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड की पहल और इन्द्रवती नाट्य समिति, सीधी के समन्वय से जिले के ग्राम पंचायत बकवा में जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मंगलवार को आयोजित भव्य समारोह में होम स्टे परियोजना के प्रथम चरण के तहत छह जनजातीय होम स्टे का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस पहल से स्थानीय जनजातीय परिवार पर्यटन आधारित स्वरोजगार से जुड़ेंगे और सीधी जिले को ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन के नए केंद्र के रूप में पहचान मिलने की उम्मीद है।

परियोजना के अंतर्गत प्रथम चरण में घोटिहारी होम स्टे (संसार सिंह), सइलाडंडा होम स्टे (लल्लू सिंह), करमा होम स्टे (वरुण सिंह), संगम होम स्टे (जगन्नाथ जायसवाल), सुआ छपइया होम स्टे (चंद्रभान सिंह) तथा डमरू होम स्टे (कृष्ण प्रताप सिंह) का लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीधी-सिंगरौली संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. राजेश मिश्र रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम ने की। विशिष्ट अतिथियों में जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू रामजी सिंह, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष एवं व्यापारी संघ जिलाध्यक्ष लालचंद गुप्ता तथा पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष एवं पूर्व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य इंद्रशरण सिंह चौहान उपस्थित रहे।

समारोह का शुभारंभ फीता काटकर एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अतिथियों का पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों के अनुसार तिलक, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर गुदुम बाजा, घसिया करमा, सइला और अहिराई लाठी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जनजातीय संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।

स्वागत उद्बोधन में इन्द्रवती नाट्य समिति के संरक्षक इंजी. आर.बी. सिंह 'दादाभाई' ने कहा कि समिति जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और ग्रामीण पर्यटन के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना स्थानीय समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ जिले की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाएगी।

इन्द्रवती नाट्य समिति द्वारा मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत बकवा में कुल 10 होम स्टे विकसित किए गए हैं। प्रथम चरण में छह होम स्टे शुरू किए गए हैं, जबकि शेष होम स्टे भी आगामी चरणों में प्रारंभ किए जाएंगे। इन होम स्टे में आने वाले पर्यटक स्थानीय जनजातीय जीवन शैली, पारंपरिक भोजन, लोक संस्कृति और प्राकृतिक वातावरण का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

इस परियोजना में हुनरशाला फाउंडेशन ने तकनीकी सहयोगी संस्था के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि इन्द्रवती नाट्य समिति ने सहयोगी संस्था के रूप में परियोजना के सफल क्रियान्वयन का दायित्व निभाया। जरब जनजातीय पर्यटन, शिक्षा एवं लोक कला विकास समिति, बकवा ने स्थानीय स्तर पर परियोजना के संचालन और समन्वय में सहयोग किया।

परियोजना के समन्वय का दायित्व पीएसओ रोशनी प्रसाद मिश्र ने संभाला। वहीं रजनीश कुमार जायसवाल और प्रजीत कुमार साकेत ने सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। होम स्टे निर्माण एवं परियोजना के क्रियान्वयन में प्रवीण सिंह चौहान की विशेष भूमिका रही। सम्पूर्ण परियोजना का नेतृत्व इन्द्रवती नाट्य समिति के सचिव नीरज कुंदेर ने किया।

अपने संबोधन में जिला पंचायत अध्यक्ष मंजू रामजी सिंह ने कहा कि यह पहल जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा देने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं और परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगी। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विधायक कुंवर सिंह टेकाम ने कहा कि सीधी जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने इस मॉडल को जिले के अन्य गांवों तक विस्तारित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे सीधी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय एवं सांस्कृतिक पर्यटन की नई पहचान मिल सकती है।

मुख्य अतिथि सांसद डॉ. राजेश मिश्र ने इन्द्रवती नाट्य समिति की पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना जनजातीय समाज के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने नीरज कुंदेर, रोशनी प्रसाद मिश्र, रजनीश कुमार जायसवाल, प्रजीत कुमार साकेत सहित पूरी टीम के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए सभी हितग्राहियों को शुभकामनाएं दीं तथा भविष्य में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, बैंक अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की रूपरेखा नीरज कुंदेर ने प्रस्तुत की, मंच संचालन रोशनी प्रसाद मिश्र ने किया तथा अंत में विवेक सिंह चौहान ने आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन जनजातीय संस्कृति के संरक्षण, ग्रामीण पर्यटन के विकास और स्थानीय परिवारों को पर्यटन आधारित स्वरोजगार से जोड़ने के संकल्प के साथ हुआ। यह पहल सीधी जिले को जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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