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Home सियासत सीधी की सियासत में ‘मुस्कान भरी मुलाकात’! फोटो वायरल, अटकलों का बाजार गर्म..?

सीधी की सियासत में ‘मुस्कान भरी मुलाकात’! फोटो वायरल, अटकलों का बाजार गर्म..?

सीधी (सचीन्द्र मिश्र)-जिले की सियासत में इन दिनों एक तस्वीर ने नई चिंगारी भड़का दी है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल और भाजपा के पूर्व विधायक केदारनाथ शुक्ला की आपसी बातचीत (गुप्तगू) की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

यह मुलाकात कांग्रेस जिलाध्यक्ष ज्ञान सिंह चौहान के एक नए उद्योग के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां मंच पर कई दिग्गज नेता एक साथ नजर आए। लेकिन असली सुर्खियां बटोरी अजय सिंह राहुल और केदारनाथ शुक्ला की ‘करीबी बातचीत’ ने, जिसने सियासी पारा चढ़ा दिया।


अब इस वायरल तस्वीर ने उन पुराने कयासों को फिर जिंदा कर दिया है, जो चुनाव के दौरान लगाए जा रहे थे—कि केदारनाथ शुक्ला कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। हालांकि तब ऐसा नहीं हुआ, और खुद श्री शुक्ला ने अपने सोशल मीडिया अकांउट पर इस मुलाकात को केवल ‘पारिवारिक संबंध’ बताया है। लेकिन राजनीति में रिश्तों की परिभाषा कब बदल जाए, ये कोई नहीं जानता।

दिलचस्प बात यह भी रही कि कार्यक्रम में टीआरएस ( दरवार) कालेज रीवा के पूर्व प्रसीडेंट ब्रजेंद्र नाथ मिश्र जिनके बड़े भाई पूर्व सांसद गोविंद मिश्र भी वर्तमान में बनवास काट रहे हैं की मौजूदगी ने ‘सियासी कॉकटेल’ को और दिलचस्प बना दिया। एक ही मंच पर सत्ता और विपक्ष के नेताओं की मौजूदगी ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या यह सिर्फ एक सामाजिक आयोजन था या फिर ‘राजनीतिक पटकथा’ की कोई नई स्क्रिप्ट लिखी जा रही है?

अब सीधी की सियासत में यह चर्चा जोरों पर है कि यह महज एक संयोग था या फिर आने वाले दिनों की ‘संकेत भरी तस्वीर’। फिलहाल नेता भले ही इसे सामान्य मुलाकात बता रहे हों, लेकिन जनता और राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘मुस्कान में छिपे संदेश’ के तौर पर देख रहे हैं।

और आखिर में सियासी गलियारों में यही फुसफुसाहट गूंज रही है—
“सीधी में राजनीति अब भाषणों से नहीं, तस्वीरों से समझी जा रही है!”

खैर नेताओं के मन्दिर में कौन सा भगवान घर कर के बैठा है यह तो वो ही जाने, लेकिन जिले की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर गौर करें तो सब सामान्य भले दिख रहा है पर सामान्य है नहीं।एक ओर जहां सत्ताधारी दल में लम्बी कतार है तो वहीं विपक्ष को एक बिप्र कद्दावर की तलाश है अब देखना है कि वायरल तस्वीर तलाश को पूरा करती है या अटकलों की दुकान बंद हो जाएगी...?

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