नई दिल्ली(ईन्यूज एमपी)- देशभर में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने देश के युवाओं की भावनाओं और आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया है। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि छात्रों के भविष्य और देश के युवाओं की भावनाएं किसी भी पद से बड़ी हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठाती रहेगी। साथ ही उन्होंने अपील की कि वर्तमान स्थिति का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। छात्र आंदोलन के बीच लिया फैसला धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब देश के कई हिस्सों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलनकारी लंबे समय से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। हाल के दिनों में यह आंदोलन और तेज हो गया था, जिसके बाद सरकार पर दबाव बढ़ता गया। सरकार ने पहले किए थे कई बड़े ऐलान इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों पर सख्ती दिखाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों के खिलाफ कड़े कानून लाने की घोषणा की थी। सरकार का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे। राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत बताया है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि यह फैसला युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया है और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की प्रक्रिया जारी रहेगी। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपती है और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।