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प्रो. रमा के सृजन के 50 वर्ष: दिल्ली विश्वविद्यालय में हुआ गरिमामय विमर्श...

नई दिल्ली(ईन्यूज़ एमपी): रचयिता फाउंडेशन द्वारा वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रमा के लेखन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ‘सृजन के सरोकार : प्रो. रमा’ विषयक एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन 28 अप्रैल 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग के संगोष्ठी कक्ष में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिनय कुमार सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सर्जना शर्मा और विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. सुशील भारती उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के संयोजक पीयूष पुष्पम ने स्वागत वक्तव्य में प्रो. रमा के बहुआयामी व्यक्तित्व और उनके निरंतर सृजनशील लेखन पर प्रकाश डालते हुए उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि सर्जना शर्मा ने प्रो. रमा के पत्रकारिता जीवन और उनके बहुमुखी योगदान को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए कहा कि उन्होंने कम उम्र से ही लेखन की शुरुआत कर ‘साप्ताहिक हिंदुस्तान’, ‘धर्मयुग’ और ‘सारिका’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
विशिष्ट वक्ता डॉ. सुशील भारती ने प्रो. रमा के जीवन-संघर्षों को उनके रचनात्मक व्यक्तित्व की आधारशिला बताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में अर्जित अनुभवों ने उनके लेखन को गहरी मानवीय संवेदनाओं से जोड़ा। उन्होंने उनके भीतर नैतिकता और संवेदना के अद्भुत संतुलन को रेखांकित किया।
अध्यक्षीय वक्तव्य में बिनय कुमार सिंह ने प्रो. रमा के साहित्यिक अवदान को विशेष रूप से स्त्री विमर्श और सिनेमा के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। वहीं, अपने संबोधन में प्रो. रमा ने अत्यंत विनम्रता के साथ अपने लेखन जीवन की यात्रा साझा करते हुए अपने विद्यार्थियों, माता-पिता और गुरुओं को अपनी उपलब्धियों का श्रेय दिया। उन्होंने ‘जनसत्ता’ में प्रभाष जोशी से मिले मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए लेखन को जीवन का अभिन्न हिस्सा बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. महेंद्र प्रजापति ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विकास गिरी द्वारा प्रस्तुत किया गया। आत्मीय वातावरण में संपन्न इस आयोजन ने प्रो. रमा के सृजनात्मक योगदान और उनके व्यक्तित्व की गरिमा को प्रभावी रूप से अभिव्यक्त किया।

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