सीधी (ईन्यूज एमपी)-विंध्य क्षेत्र में पेयजल योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट बरकरार बना हुआ है। सरकार द्वारा जल जीवन मिशन और नल-जल योजनाओं के माध्यम से हर घर तक पेयजल पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई गांवों में लोग आज भी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में योजनाओं के क्रियान्वयन, गुणवत्ता और विभागीय निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कहने को तो सरकार पेयजल आपूर्ति के लिए तरह तरह की योजनाएं चला रही है पानी के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन अगर वास्तविकता के धरातल की ओर देखे तो ये करोड़ों रुपए पानी की तरह व्यर्थ हो गए हैं। कहने को तो गांव गांव नल-जल योजनाओं का जाल बिछाया गया है लोगों को नल से जल मिल रहा है पर हकीकत कुछ और ही है । अनूपपुर ,सीधी , सिंगरौली , रीवा और मऊगंज जिलों की स्थिति काफी चिंताजनक है। यही कारण है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ चले मोहन के चाबुक से विंध्य में भ्रष्टाचारी हुये ढेर हुये हैं । बात करें जिम्मेदार अधिकारी की तो प्रभार में मिली कुर्सी की जिम्मेदारी केवल नेताओं को खुश करने तक ही सीमित है। सीधी के प्रभारी पीएचई ई त्रैम्बकेश्वर द्विवेदी द्वारा कागजी घोड़े दौड़ाकर कोरमपूर्ती की जा रही है दो दो जिले सीधी और सिंगरौली का प्रभार लिए महोदय द्वारा माननीय जनों का केवल वंदन किया जा रहा है जिससे कुर्सी बची रहे। लेकिन काम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा हुआ है।कहीं केवल टंकी खड़ी है तो कहीं नल की टोटी लगी है पानी की उपलब्धता नाम मात्र की भी नहीं है। हाल ही में अनूपपुर जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री अमित कुमार साह को आर्थिक अनियमितता से जुड़े एक मामले में EOW रीवा की जांच एजेंसी द्वारा 30 हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने की कार्रवाई ने विभागीय कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद विंध्य क्षेत्र में चल रही जल योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मऊगंज जिले की नईगढ़ी जनपद अंतर्गत ग्राम खटखरी में जल जीवन मिशन के तहत निर्मित पानी की टंकी के परीक्षण के दौरान ढह जाने का मामला भी चर्चा में रहा। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित टंकी के गिरने के बाद निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों ने निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया है। हालांकि मामले की जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे। सिंगरौली जिले में भी जलप्रदाय योजनाओं की लागत में भारी वृद्धि को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप हैं कि कुछ योजनाओं की पुनरीक्षित लागत मूल स्वीकृत राशि की तुलना में कई गुना बढ़ा दी गई। मामले में विभागीय स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। हालांकि संबंधित मामलों में आधिकारिक जांच और निष्कर्ष का इंतजार है।