भोपाल(ईन्यूज एमपी)-मध्यप्रदेश के करीब 4.5 लाख शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने पदोन्नति प्रक्रिया को गति देने के लिए नए पदोन्नति नियमों पर अमल शुरू कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागाध्यक्षों के साथ बैठक कर सभी विभागों को एक सप्ताह के भीतर कैडरवार एवं एकमुश्त वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह प्रक्रिया मध्यप्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत पूरी की जाएगी। करीब दस वर्षों से प्रदेश में पदोन्नति की प्रक्रिया रुकी हुई थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए। अब नए नियम लागू होने के बाद लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। मेरिट और वरिष्ठता दोनों को मिलेगा महत्व नए नियमों के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति मैरिट-कम-सीनियरिटी के आधार पर होगी, जबकि अन्य कर्मचारियों के लिए सीनियरिटी-कम-मैरिट का सिद्धांत लागू किया जाएगा। पदोन्नति में गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर) की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। जिन कर्मचारियों की एसीआर उपलब्ध नहीं होगी और इसमें उनकी कोई गलती नहीं होगी, उन्हें केवल इस आधार पर पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाएगा। केवल कारण बताओ नोटिस जारी होने मात्र से भी पदोन्नति नहीं रोकी जाएगी। आरक्षण के प्रावधान भी रहेंगे लागू पदोन्नति के लिए रिक्त पदों का आरक्षण के अनुसार वर्गीकरण किया जाएगा। इनमें 16 प्रतिशत पद अनुसूचित जाति और 20 प्रतिशत पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित रहेंगे। शेष पदों पर सभी पात्र कर्मचारी प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। दो लाख पद होंगे रिक्त, युवाओं को मिलेगा अवसर सरकार का अनुमान है कि बड़े पैमाने पर पदोन्नतियां होने से करीब दो लाख पद रिक्त होंगे। इन रिक्त पदों पर भविष्य में नई भर्तियों का रास्ता खुलेगा, जिससे प्रदेश के युवाओं को सरकारी नौकरी के अधिक अवसर मिल सकेंगे। कानूनी पहलुओं पर भी सरकार की तैयारी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर पूर्व में विभिन्न न्यायालयों में विवाद चल चुके हैं। सरकार का कहना है कि संभावित कानूनी अड़चनों का अध्ययन कर आवश्यक तैयारी की गई है। हालांकि कुछ कर्मचारी संगठनों ने नए नियमों पर आपत्ति भी जताई है और उनका कहना है कि इससे आरक्षण व्यवस्था को लेकर असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। सरकार का उद्देश्य लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को जल्द पूरा कर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाना और कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ उपलब्ध कराना है।