डीजीपी, आईजी, एसपी से लेकर मानवाधिकार आयोग और प्रभारी मंत्री तक पहुंची आपत्ति; शिकायतकर्ता ने दस्तावेजों के साथ सौंपा आवेदन, निष्पक्ष जांच पर उठाए गंभीर सवाल सीधी(ईन्यूज एमपी)- पुलिस महकमे में पदस्थापना को लेकर मड़वास थाना इन दिनों सवालों के घेरे में है। जिस थाना क्षेत्र से एसआई भूपेश वैस को पूर्व में हटाया गया था, उसी मड़वास थाने में 8 सितंबर 2026 को दोबारा थाना प्रभारी के रूप में उनकी पदस्थापना किए जाने पर शिकायतकर्ता ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। मामला अब केवल पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि डीजीपी, आईजी, एसपी, मानवाधिकार आयोग सहित सीधी दौरे पर आए प्रभारी मंत्री को भी आवेदन मय दस्तावेज सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता अभिमन्यु कुमार सिंह का कहना है कि एसआई भूपेश वैस के विरुद्ध उनके और उनके पारिवारिक सदस्यों से जुड़े मामले में मानवाधिकार संबंधी शिकायत पहले से लंबित है। ऐसे में उसी अधिकारी को उसी थाना क्षेत्र की कमान सौंपे जाने से शिकायत की निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पूर्व में उनके पारिवारिक सदस्यों के विरुद्ध कथित रूप से झूठी एवं मनगढ़ंत NDPS कार्रवाई की गई। इसके अलावा चिकित्सकीय रूप से रेफर किए जाने के बाद भी उन्हें जिला जेल में रखने का प्रयास किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में मानवाधिकार प्राधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, मानवाधिकार प्राधिकारी ने मामले में पुलिस अधीक्षक सीधी से प्रतिवेदन, जवाब, CCTV फुटेज सहित अन्य दस्तावेज मांगे हैं। ऐसे में शिकायतकर्ता का तर्क है कि जब मामला अभी जांच के दायरे में है तो संबंधित अधिकारी को उसी थाने का प्रभारी बनाया जाना जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। जिस थाने से हटे, वहीं फिर कुर्सी... सवाल तो उठेंगे ही! शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि 26 जनवरी 2026 को एसआई भूपेश वैस को मड़वास थाने से हटाया गया था। आवेदन में उनके विरुद्ध फर्जी अपराध पंजीयन सहित अन्य आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि पूर्व में संबंधित अधिकारी को मड़वास से हटाया गया था तो आखिर कुछ ही महीनों बाद उसी थाना क्षेत्र में फिर थाना प्रभारी की जिम्मेदारी क्यों दी गई? और जब उनके विरुद्ध शिकायत की जांच अभी लंबित बताई जा रही है, तब उसी स्थान पर पदस्थापना से शिकायतकर्ता और उसके परिवार को निष्पक्ष जांच का भरोसा कैसे मिलेगा? डीजीपी से प्रभारी मंत्री तक पहुंची शिकायत मामले को गंभीर बताते हुए शिकायतकर्ता ने पुलिस महानिदेशक (DGP), पुलिस महानिरीक्षक (IG), पुलिस अधीक्षक (SP), मानवाधिकार आयोग सहित सीधी दौरे पर आए प्रभारी मंत्री को भी आवेदन सौंपा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि सभी संबंधित अधिकारियों को आवेदन के साथ उपलब्ध दस्तावेज भी दिए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि लंबित मानवाधिकार शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक ऐसी पदस्थापना पर पुनर्विचार किया जाए, जिससे किसी भी पक्ष को जांच प्रभावित होने की आशंका न रहे। अब निगाहें पुलिस विभाग के आला अधिकारियों और प्रशासन पर हैं कि इस शिकायत पर क्या रुख अपनाया जाता है। क्योंकि मामला केवल एक थाना प्रभारी की पोस्टिंग का नहीं, बल्कि लंबित शिकायत की निष्पक्षता और पुलिस व्यवस्था में आम नागरिक के भरोसे से भी जुड़ा हुआ है।