नवाचार, जनभागीदारी, समर्पण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रयासों को मिला सम्मान सीधी(ईन्यूज एमपी)- शिक्षक दिवस के अवसर पर सीधी जिले के लिए गौरव का क्षण है। जिले के तीन शिक्षकों का चयन शिक्षक पुरस्कारों के लिए हुआ है। इनमें दो शिक्षकों—शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अमरपुर के प्राथमिक शिक्षक राकेश कुमार द्विवेदी और शासकीय हाई स्कूल बम्हनी के माध्यमिक शिक्षक सतीश कुमार पाण्डेय—का चयन राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए किया गया है। वहीं शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कंजवार के माध्यमिक शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र प्रताप सिंह को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चुना गया है। शैलेन्द्र प्रताप सिंह को 5 सितंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा। राकेश कुमार द्विवेदी ने बदली बच्चों की सीखने की तस्वीर अमरपुर विद्यालय के शिक्षक राकेश कुमार द्विवेदी ने शाला त्यागी बच्चों के पुनः नामांकन, नियमित उपस्थिति और सीखने के प्रति रुचि बढ़ाने पर विशेष कार्य किया। गृह-अभिभावक संपर्क, स्थानीय भाषा, एसएमसी एवं पीटीएम की नियमित बैठकों के माध्यम से अभिभावकों और समुदाय को शिक्षा से जोड़ा गया। बाल-केंद्रित शिक्षण, टीएलएम, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों और मोहल्ला कक्षाओं ने बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को आनंददायी और भयमुक्त बनाया। एफएलएन आधारित नवाचारी शिक्षण के परिणामस्वरूप बुनियादी साक्षरता का स्तर 25 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत तथा संख्या ज्ञान 22 प्रतिशत से बढ़कर 82 प्रतिशत तक पहुंचा। विद्यालय में शाला त्यागी बच्चों की संख्या शून्य हुई। बाल कैबिनेट के माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के साथ वृक्षारोपण एवं संरक्षण में समुदाय की सहभागिता भी सुनिश्चित की गई। सतीश कुमार पाण्डेय ने विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं रुकने दी पढ़ाई शासकीय हाई स्कूल बम्हनी के शिक्षक सतीश कुमार पाण्डेय ने कोरोना काल में शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने के लिए करीब 480 विद्यार्थियों को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से घर बैठे शिक्षा से जोड़ा। जिन विद्यार्थियों के पास मोबाइल की सुविधा नहीं थी, उनके लिए अभिभावकों एवं शिक्षकों की टीम के माध्यम से मोबाइल उपलब्ध कराए गए। विद्यार्थियों तक कॉपी, पेन, किताब, मास्क और सैनिटाइजर भी पहुंचाए गए। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 10 गांवों में संपर्क कर बालिकाओं को विद्यालय में प्रवेश और शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित किया गया। संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए निबंध, चित्रकला, श्लोक गायन और संस्कृत संभाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। टीएलएम आधारित शिक्षण से कमजोर विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ा गया। विद्यालय में ड्रॉपआउट शून्य रहा और नामांकन में वृद्धि हुई। विद्यार्थियों का सुपर-100 तथा राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में चयन भी विद्यालय की उपलब्धियों में शामिल रहा। शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने जनभागीदारी से बदली कंजवार स्कूल की तस्वीर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कंजवार के शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र प्रताप सिंह की शिक्षकीय यात्रा वर्ष 2011 में शासकीय प्राथमिक शाला अगरियान टोला कंजवार से शुरू हुई थी। उस समय विद्यालय में मात्र 11 विद्यार्थी थे। निरंतर प्रयासों से नामांकन बढ़कर 121 तक पहुंचा और विद्यार्थियों ने जवाहर नवोदय विद्यालय सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। 13 अगस्त 2024 को कंजवार विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने ग्रामवासियों, पालकों, विद्यालय प्रबंधन समिति और जनप्रतिनिधियों को जोड़कर जनभागीदारी अभियान चलाया। करीब 5 लाख रुपये के सहयोग से बाउंड्री वॉल, पेयजल, भवन मरम्मत, रंगाई-पुताई और फर्नीचर सहित विभिन्न कार्य कराए गए। विद्यालय के नवीन भवन के लिए 51 लाख रुपये तथा विधायक निधि से 25 लाख रुपये की स्वीकृति भी प्राप्त हुई। इन प्रयासों का असर नामांकन और उपस्थिति पर भी दिखाई दिया। विद्यालय का नामांकन 69 से बढ़कर 202, बालिकाओं की संख्या 36 से बढ़कर 107 तथा नियमित उपस्थिति 44 से बढ़कर 96 प्रतिशत हुई। 26 ड्रॉपआउट विद्यार्थियों का पुनः नामांकन कर विद्यालय को जीरो ड्रॉपआउट बनाया गया। दिव्यांग विद्यार्थी को विद्यालय तक पहुंचाने में व्यक्तिगत सहयोग देकर उन्होंने समावेशी शिक्षा की मिसाल पेश की। 500 टीएलएम और 1336 पौधों से नवाचार को मिली नई दिशा शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने करीब 500 टीएलएम, एफएलएन बगीचा, क्यूआर आधारित शिक्षण और पोषण वाटिका जैसे नवाचार किए। पर्यावरण संरक्षण के लिए 1336 पौधों का रोपण किया गया। विद्यालय के दो विद्यार्थियों का जवाहर नवोदय विद्यालय और दो का सैनिक विद्यालय में चयन हुआ। शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने दो ISBN युक्त पुस्तकों का लेखन-प्रकाशन और छह क्रियात्मक शोध भी किए हैं। वे राज्य एवं जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर के रूप में शिक्षकों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें राज्य एवं जिला स्तर पर विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। जिले के लिए बड़ी उपलब्धि शिक्षक दिवस पर सीधी के तीन शिक्षकों का राज्य और राष्ट्रीय स्तर के शिक्षक पुरस्कारों के लिए चयन जिले की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। तीनों शिक्षकों की कार्यशैली में एक समान बात दिखाई देती है—सीमित संसाधनों के बीच नवाचार, समुदाय की भागीदारी और विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशीलता। राकेश कुमार द्विवेदी ने बुनियादी शिक्षा और बच्चों को स्कूल से जोड़ने पर काम किया, सतीश कुमार पाण्डेय ने विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा की निरंतरता बनाए रखी, जबकि शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने जनभागीदारी और नवाचार के माध्यम से ग्रामीण सरकारी विद्यालय की तस्वीर बदलने का उदाहरण प्रस्तुत किया। इन शिक्षकों की उपलब्धियां न केवल सीधी जिले के लिए गौरव का विषय हैं, बल्कि सरकारी विद्यालयों में समर्पित शिक्षकों के प्रयासों से सकारात्मक बदलाव की प्रेरक मिसाल भी हैं।अगर चाहें तो मैं इसी संयुक्त समाचार का दमदार अखबारी हेडिंग, 10 लाइन की ब्रेकिंग, SEO टाइटल/मेटा डिस्क्रिप्शन और फेसबुक पोस्ट भी तैयार कर सकता हूं।