मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विभाग हुए सक्रिय, रोजाना ली जा रही पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश में करीब एक दशक बाद शुरू हुई अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया अब रफ्तार पकड़ने लगी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हस्तक्षेप के बाद विभागीय स्तर पर पदोन्नति संबंधी कार्य तेज कर दिए गए हैं। सबसे अधिक उत्साह उन कर्मचारियों में देखा जा रहा है, जो पिछले 10 वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे। जानकारी के अनुसार, प्रदेश में एक जुलाई से पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन शुरुआती दिनों में इसकी गति धीमी रही। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभागीय मंत्रियों को स्वयं निगरानी करने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को भी पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी विभागों को पदोन्नति की प्रगति ऑनलाइन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में पिछले दो दिनों से विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकें लगातार आयोजित की जा रही हैं। सबसे बड़ी प्रक्रिया पुलिस विभाग में चल रही है, जहां **11 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों** की पदोन्नति प्रस्तावित है। वहीं ऊर्जा विभाग में अब तक करीब **4500 पदोन्नतियां** किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, लोक निर्माण, सामान्य प्रशासन, पशुपालन तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभागों में भी पदोन्नति की प्रक्रिया जारी है। सामान्य प्रशासन विभाग सभी विभागों से उपलब्ध रिक्त पदों और जारी किए गए पदोन्नति आदेशों का प्रतिदिन ब्योरा ले रहा है। विभागों को नियमित रूप से अपनी प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस विभाग में आरक्षक से प्रधान आरक्षक, प्रधान आरक्षक से सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई), एएसआई से उपनिरीक्षक (एसआई) तथा उपनिरीक्षक से निरीक्षक पद तक पदोन्नति की सूची तैयार की जा रही है। एएसआई स्तर तक की पदोन्नतियां जिला स्तर पर की जाएंगी, जबकि उससे ऊपर की पदोन्नति प्रक्रिया पुलिस मुख्यालय द्वारा पूरी की जाएगी। वहीं निरीक्षक से उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) पद पर पदोन्नति के लिए गृह विभाग ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके लिए राज्य लोक सेवा आयोग से समय लेकर विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित की जाएगी। सरकार का मानना है कि लंबे समय से लंबित पदोन्नतियां होने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शासकीय कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार आएगा।