भोपाल(ईन्यूज एमपी)-मध्यप्रदेश सरकार रीवा स्थित श्रीरामानुज संस्कृत परिसर को संस्कृत, वैदिक अध्ययन और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा के सशक्तीकरण एवं संस्थागत विकास से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को 243 पदों के सृजन का प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अनुपम राजन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान परिसर में अध्ययन-अध्यापन, शोध, प्रकाशन, परीक्षा, प्रशासनिक कार्यों एवं विस्तार गतिविधियों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक मानव संसाधनों की उपलब्धता पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्ताव के अनुसार परिसर में कुल 243 पदों का सृजन किया जाएगा, जिन्हें आगामी तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा। इनमें 117 शैक्षणिक, 4 प्रशासनिक तथा 122 गैर-शैक्षणिक पद शामिल हैं। इन पदों के सृजन से परिसर में शैक्षणिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और विद्यार्थियों व शोधार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर को संस्कृत भाषा, वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, प्राचीन शास्त्रों और भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन-अध्यापन एवं शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध मार्गदर्शन और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने परिसर के रखरखाव, शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार तथा आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पदों की स्वीकृति के बाद परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों के अनुरूप शैक्षणिक वातावरण विकसित किया जाएगा। इससे संस्कृत भाषा, वैदिक ज्ञान, भारतीय दर्शन और पारंपरिक विद्या प्रणालियों के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रसार को नई दिशा मिलेगी। श्रीरामानुज संस्कृत परिसर की स्थापना मध्यप्रदेश शासन द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को की गई थी। वर्तमान में परिसर में सीमित संसाधनों के साथ शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। परिसर में वेद, वेदान्त दर्शन, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, संस्कृत, योग, पुराणेतिहास, धर्मशास्त्र, वास्तुशास्त्र, संगीत, मानविकी, पौरोहित्य, हिन्दू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा शिक्षाशास्त्र सहित विभिन्न विभागों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव है। उप मुख्यमंत्री ने इन विभागों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुरूप प्रोफेसर, सह प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापक के पदों के सृजन का प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रीवा का श्रीरामानुज संस्कृत परिसर भविष्य में भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के संरक्षण एवं शोध का एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभरेगा।