भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई से पहले बारिश का एक और दौर आने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 19 सितंबर के बाद प्रदेश में नया मौसम सिस्टम सक्रिय हो सकता है। यदि यह सिस्टम मजबूत रहा तो प्रदेश में मानसूनी बारिश का कोटा पूरा होने की संभावना बन सकती है। प्रदेश में अब तक करीब 33 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि सामान्य मानसूनी औसत 37.3 इंच है। इस लिहाज से सामान्य बारिश का आंकड़ा छूने के लिए प्रदेश को अभी करीब 4.3 इंच बारिश की जरूरत है। 17 से 21 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार 17 से 19 सितंबर के बीच पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश की गतिविधियां अधिक व्यापक हो सकती हैं। वहीं 18 से 21 सितंबर के दौरान पूर्वी मध्यप्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। मंगलवार को पश्चिमी मध्यप्रदेश में एक निम्न दाब क्षेत्र सक्रिय रहा। इसके साथ मानसून ट्रफ की गतिविधि भी बनी रही, हालांकि प्रदेश में कहीं भी तेज बारिश दर्ज नहीं हुई। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन के समय धूप खिली रही। 14 दिन में पूरा हो सकता है बारिश का कोटा मानसूनी सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। मंगलवार तक प्रदेश में सामान्य बारिश के मुकाबले 88.5 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। अब मानसूनी सीजन में करीब 14 दिन शेष हैं। ऐसे में सितंबर के दूसरे पखवाड़े में सक्रिय होने वाला सिस्टम प्रदेश के बारिश के आंकड़े को सामान्य औसत तक पहुंचा सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की औपचारिक विदाई कई बार अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक भी होती है। हालांकि इस बार सितंबर के आखिरी सप्ताह से मानसून की विदाई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। विदाई से पहले बारिश का एक और दौर प्रदेश में देखने को मिल सकता है। 18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। इन जिलों में आगे होने वाली बारिश सामान्य औसत की तुलना में अतिरिक्त मानी जाएगी। वहीं इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। आलीराजपुर में सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हो पाई है। दूसरी ओर निवाड़ी में सामान्य से करीब 49 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। मानसून के अंतिम दिनों में बनने वाला नया सिस्टम प्रदेश के उन जिलों के लिए महत्वपूर्ण होगा, जहां अभी सामान्य से कम बारिश हुई है।