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मध्य प्रदेश में मानसून का नया सिस्टम एक्टिव, 3 दिन तेज बारिश का अलर्ट; 40 जिलों में अब भी औसत से कम पानी

भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। प्रदेश में अब तक औसतन 648.7 मिमी यानी 25.5 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह सामान्य बारिश से करीब 3.1 इंच कम है। मौसम विभाग के अनुसार अब तक प्रदेश में कुल कोटे की करीब 68 प्रतिशत बारिश हुई है और ओवरऑल बारिश सामान्य से 11 प्रतिशत कम है।

मानसून की गतिविधियां अब पूर्वी मध्य प्रदेश से खिसककर उत्तरी, पश्चिमी और मध्य हिस्सों में सक्रिय होने की संभावना है। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार अगले दो दिनों में भोपाल, उज्जैन, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग के कई जिलों में तेज बारिश हो सकती है।

भिंड, दतिया और सागर में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने बुधवार को भिंड, दतिया और सागर जिले में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान ढाई इंच से अधिक बारिश होने की संभावना है।

इसके अलावा ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, सीहोर, शाजापुर, राजगढ़, आगर-मालवा, उज्जैन, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, दमोह, मैहर और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

भोपाल, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और निवाड़ी में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

अगले तीन दिन सक्रिय रहेगा मानसून

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार प्रदेश में मौसम सिस्टम की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। इसके कारण कई जिलों में तेज बारिश हो रही है। अगले तीन दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

40 जिलों में औसत से कम बारिश

प्रदेश के 40 जिलों में 3 से 50 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश करीब 19 प्रतिशत तक कम रही है।

पूर्वी हिस्से के बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ और डिंडौरी सहित कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है।

पश्चिमी हिस्से में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, खंडवा, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी औसत से कम पानी गिरा है।

इन 15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

प्रदेश में केवल 15 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, डिंडौरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खरगोन और राजगढ़ शामिल हैं।

जून की कमी जुलाई-अगस्त में भी पूरी नहीं हुई

मौसम विभाग के अनुसार जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति में सुधार हुआ और जुलाई का बारिश कोटा पूरा हो गया, लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो सकी।

इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ, जिसके कारण कई दिनों तक बारिश का दौर कमजोर रहा। अगस्त के अंतिम सप्ताह में एक बार फिर मजबूत सिस्टम सक्रिय होने से प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश हुई है। इसके बावजूद सीजन में अब तक बारिश सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम है।

प्रदेश में 37.3 इंच सामान्य बारिश

मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान सामान्य बारिश करीब 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख जिलों में सामान्य वार्षिक बारिश करीब 38 से 39 इंच के आसपास रहती है।

भोपाल में अगस्त में जमकर बरसता है मानसून

राजधानी भोपाल में अगस्त मानसून के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण महीना है। अगस्त में भोपाल में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड वर्ष 2006 में बना था, जब महीने में करीब 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी। वहीं 14 अगस्त 2006 को 24 घंटे में करीब 12 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी।

इसके अलावा वर्ष 2015 और 2022 में भी भोपाल में अगस्त के दौरान 30 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। राजधानी में अगस्त के दौरान औसतन करीब 14 दिन बारिश होती है। मौसम सिस्टम सक्रिय होने पर जुलाई और अगस्त में बारिश का दौर और तेज हो जाता है।

फिलहाल मौसम विभाग की नजर प्रदेश में सक्रिय सिस्टम पर है। अगले तीन दिनों में बारिश का वितरण कई जिलों में बदल सकता है। भारी बारिश वाले जिलों में नदी-नालों के जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।

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