सीधी ( ईन्यूज एमपी)मध्य प्रदेश। राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के निर्देशों के अनुसार विकासखंड अकादमिक समन्वयक (BAC) एवं जन शिक्षक पदों पर प्रतिनियुक्ति निर्धारित अवधि के लिए की जानी है। नियमों के अनुसार इन पदों पर सामान्यतः तीन वर्ष के लिए चयन किया जाता है और यदि समय पर नई चयन प्रक्रिया न हो सके तो अधिकतम एक वर्ष की अवधि बढ़ाई जा सकती है। लेकिन हाल ही में जारी पद पूर्ति प्रक्रिया ने पूरे प्रदेश में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। किंतु सीधी जिले में सम्पन्न चयन प्रक्रिया में सर्वाधिक नियमों की अनदेखी कर अपात्रों को गांधी जी के बल पर पात्र घोंषित कर दिया गया है । सीधी के जिम्मेदार अधिकारी पर आरोप हैं कि केवल रिक्त पदों पर चयन कर प्रक्रिया पूरी कर दी गई, जबकि वर्षों से एक ही पद पर जमे शिक्षकों को यथावत बनाए रखा गया है। बताया जा रहा है कि प्रदेश के कई जिलों में 10 से 15 वर्षों से एक ही शिक्षक विकासखंड अकादमिक समन्वयक और जन शिक्षक के पदों पर कार्यरत हैं। वहीं यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्धारित आयु सीमा से अधिक उम्र के कई शिक्षक भी आज तक इन पदों पर संलग्न हैं। अब सवाल यह है कि यदि राज्य शिक्षा केंद्र के निर्देश सभी जिलों के लिए समान हैं, तो फिर समान नियमों का पालन सीधी में क्यूं नहीं हुआ? क्या चयन प्रक्रिया पारदर्शी रही, या फिर नियमों की अलग-अलग व्याख्या कर मनमाने तरीके से पद पूर्ति की गई...? प्रदेशभर के शिक्षकों में इस प्रक्रिया को लेकर असंतोष दिखाई दे रहा है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों जो इस प्रक्रिया में शामिल होकर भी पात्र नही हो पाये कारण कि वह गैर गांधी रहे हैं । पर्दे के पीछे से शिक्षकों ने सीधी के न्याय प्रिय कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पात्रता, कार्यकाल तथा आयु सीमा के आधार पर सभी पदों की पारदर्शी समीक्षा कर नई चयन प्रक्रिया लागू की जाए। अब सबसे बड़ा सवाल...देखना होगा समझना होगा कि सीधी कलेक्टर शिक्षा जगत की इस इस प्रक्रिया को दूषित करने वाले आला अधिकारियों पर आगे कुछ कार्यवाही करेंगें या फिर ठण्डे बस्ते में बदस्तूर मामला फलेफूलेगा...? शिक्षा विभाग इस पूरे मामले की जांच कराएगा, या फिर वर्षों से चली आ रही व्यवस्था यूँ ही जारी रहेगी...?