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36 वर्षों की निष्कलंक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए एस.एन. द्विवेदी, प्रशासनिक कार्यशैली की छोड़ गए मिसाल

सीधी(ईन्यूज एमपी)- प्रशासनिक सेवा में लंबे समय तक कार्य करते हुए अपनी सादगी, निष्पक्षता और कार्यकुशलता से अलग पहचान बनाने वाले आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी श्रीनिवास (एस.एन.) द्विवेदी 31 मई को 36 वर्ष 4 माह की सफल सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो गए। उनकी सेवानिवृत्ति के साथ ही एक ऐसे अधिकारी की प्रशासनिक पारी का समापन हुआ, जिसने अपने पूरे सेवाकाल में बिना किसी विवाद के जनहित और प्रशासनिक दायित्वों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

एस.एन. द्विवेदी की पहली नियुक्ति 29 जनवरी 1990 को जबलपुर में मंडल संयोजक के रूप में हुई थी। इसके बाद वर्ष 2000 में वे सीधी पहुंचे और आदिवासी विकास विभाग में अपनी सेवाएं देना शुरू किया। सीधी और तत्कालीन संयुक्त सिंगरौली जिले के लगभग सभी विकासखंडों में उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन किया।

वर्ष 2006 में पदोन्नति के बाद वे संयोजक बने। वर्ष 2014 में उनका स्थानांतरण शहडोल हुआ, लेकिन एक वर्ष बाद ही जनपद पंचायत कुसमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के रूप में पुनः क्षेत्र में लौट आए। इसके बाद नरसिंहपुर, आदिवासी परियोजना कुसमी, मझौली तथा सीधी में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया। जनवरी 2025 में वे सहायक आयुक्त के पद पर पदस्थ हुए और वहीं से सेवानिवृत्त हुए।

वनांचल क्षेत्र के विकास में निभाई अहम भूमिका

कुसमी और वनांचल क्षेत्रों में उनकी विशेष पहचान रही। आदिवासी अंचलों में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की निगरानी तथा प्रशासन और आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्थानीय लोग उन्हें एक अधिकारी नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के रूप में देखते थे।

कोरोना काल में अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालते हुए उन्होंने कुसमी और मझौली क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूती प्रदान की। वहीं कुसमी में विकसित की गई "तमन्ना वाटिका" और व्यापक वृक्षारोपण अभियान आज भी उनकी दूरदर्शिता और पर्यावरण प्रेम की पहचान बने हुए हैं।

पद नहीं, जिम्मेदारी को दी प्राथमिकता

सेवानिवृत्ति के अवसर पर एस.एन. द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में कभी किसी पद की मांग नहीं की। प्रशासन ने जहां जो जिम्मेदारी सौंपी, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा कि सभी के साथ सामंजस्य बनाकर कार्य करें और किसी के साथ मनमुटाव की स्थिति न बने।

मुस्कान और सादगी बनी पहचान

लंबे समय तक सीधी जिले में सेवाएं देने वाले एस.एन. द्विवेदी का व्यक्तित्व भी हमेशा चर्चा में रहा। चेहरे पर मंद मुस्कान, सहज व्यवहार और अपनी विशिष्ट शैली ने उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग पहचान दिलाई। कलेक्टर बदलते रहे, प्रशासनिक परिस्थितियां बदलती रहीं, लेकिन उनकी कार्यशैली और व्यवहार में कभी बदलाव नहीं आया।

उनकी सेवानिवृत्ति पर प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान को याद किया। लोगों का कहना है कि एस.एन. द्विवेदी ने प्रशासनिक सेवा में ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण का जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

वनांचल के विकास, आदिवासी हितों और जनसेवा को समर्पित रही एस.एन. द्विवेदी की 36 वर्षों की प्रशासनिक यात्रा

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