सीधी(ईन्यूज एमपी)- जिले के रामपुर नैकिन क्षेत्र में अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट और स्थानीय ग्रामीणों के बीच पिछले 17 वर्षों से चला आ रहा विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। खनन गतिविधियों से प्रभावित 29 परिवारों को प्रति मकान साढ़े तीन लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया, जिसके बाद सभी परिवारों ने अपने मकान खाली कर दिए। जानकारी के अनुसार, प्लांट के माइनिंग क्षेत्र के आसपास स्थित मकानों को खनन कार्यों के कारण नुकसान पहुंचने और सुरक्षा संबंधी खतरे की शिकायत लंबे समय से की जा रही थी। ग्रामीणों का कहना था कि लगातार हो रही ब्लास्टिंग और खनन गतिविधियों से उनके मकानों में दरारें आ रही हैं तथा वहां रहना जोखिमपूर्ण हो गया है। इस मुद्दे को लेकर कई बार आंदोलन और शिकायतें भी की गईं, लेकिन वर्षों तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर विकास मिश्रा ने हस्तक्षेप किया। उनके निर्देश पर तहसीलदार रामपुर नैकिन आशीष मिश्रा और थाना प्रभारी सुधांशु तिवारी को दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित कर समाधान निकालने की जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रशासन की पहल और लगातार वार्ताओं के बाद प्लांट प्रबंधन तथा प्रभावित परिवारों के बीच सहमति बन गई। सहमति के तहत शांति साकेत, सीमा साकेत, निराशा साकेत और सुनीता साकेत सहित कुल 29 परिवारों को उनके मकानों के एवज में साढ़े तीन लाख रुपये प्रति मकान की दर से मुआवजा दिया गया। मुआवजा प्राप्त होने के बाद सभी परिवारों ने स्वेच्छा से अपने मकान खाली कर दिए। इसके बाद सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए तहसीलदार आशीष मिश्रा और थाना प्रभारी सुधांशु तिवारी की मौजूदगी में खाली कराए गए सभी 29 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि संबंधित क्षेत्र माइनिंग जोन में आता है, जहां निवास करना लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता था। संभावित दुर्घटनाओं और जनहानि की आशंका को देखते हुए यह कार्रवाई की गई। प्रशासन ने इसे लंबे समय से लंबित विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।