गैस एजेंसी संचालक पर आपराधिक प्रकरण क़ायम करने कलेक्टर को लिखा पत्र सीधी ( ईन्यूज एमपी)-टोंको- रोंको-ठोंको क्रन्तिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी नें कलेक्टर सीधी को पत्र लिख कर कार्यवाही की मांग करते हुए कहा है की सीधी शहर के अस्पताल चौक में संचालित प्रताप गैस एजेंसी नें गैस संकट को "आपदा में अवसर मान लिया है"। जिसके चलते गैस वितरण में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार किया जा रहा है। गैस एजेंसी के संचालक की काली कमाई तो छानबीन से उजागर होगी परन्तु एजेंसी के लग्गू-भग्गू करोड़ों में खेलते दिख रहे है। निर्देशित नियम का पालन न करने के कारण गैस उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रताप गैस एजेंसी की बेलगाम भर्रेशाही पर लगाम लगाने हेतु गैस उपभोक्ताओं द्वारा शिकायत भी की जाती है, दंडात्मक कार्यवाही न होने के कारण उपभोक्ताओं में मायूसी एवं नाराजगी है तथा गैस एजेंसी संचालक के हौसले बुलंद है। श्री तिवारी नें शिकायत पत्र देकर कलेक्टर से आग्रह है की शिकायत पत्र में अंकित बिंदुवार अनियमिताओं की जांच कर प्रताप गैस एजेंसी का लाइसेंस निरस्त कराये जाने की कार्यवाही करें और संचालक के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण क़ायम कराएं। पत्र जो जाँच कर कार्यवाही हेतु कलेक्टर को दिया गया है उसके बिंदु निम्नानुसार है- 1. गैस बुकिंग के बाद 48 से 72 घंटे के भीतर सिलेंडर की डिलीवरी होना आवश्यक है, लेकिन उपभोक्ताओं को कई-कई दिनों एवं सप्ताह तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। 2. जो उपभोक्ता स्वतः गैस एजेंसी के गोदाम से सिलेंडर प्राप्त कर रहा है तो उससे डिलीवरी शुल्क नहीं लेना चाहिए, किंतु एजेंसी द्वारा आज तक किसी भी उपभोक्ता को यह लाभ न देकर अबैध उगाही की जा रही है। 3. पिछले लगभग 2 महीनों से एजेंसी द्वारा KYC के नाम पर प्रति उपभोक्ता ₹240 की अवैध वसूली की जा रही है। हजारों उपभोक्ताओं से राशि वसूली गई, परंतु न कोई रसीद दी गई और न ही कोई वैधानिक जानकारी। जबकि KYC प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क होती है। 4. प्रताप गैस एजेंसी द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के वास्तविक कनेक्शनधारियों को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाता जबकि एजेंसी से जुड़े दलालों एवं अवैध विक्रेताओं को बड़ी मात्रा में सिलेंडर दिए जाते हैं, जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में ₹2500 से ₹3000 तक में बेचा जा रहा है। 5. प्रताप गैस एजेंसी द्वारा जिले भर में ग्रामीण दुकानदारों एवं अवैध विक्रेताओं को सीधे सिलेंडर उपलब्ध कराकर मनमानी क़ीमत पर बिक्री कराकर कालाबाजारी की जा रही है, जबकि वास्तविक कनेक्शनधारी उपभोक्ता गैस के लिए भटकते रहते हैं। 6. नियम अनुसार उपभोक्ता द्वारा OTP सत्यापन के बाद ही सिलेंडर वितरण होना चाहिए, परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति को 15 से 20 सिलेंडर तक दिए जाने की शिकायतें हैं, जो गंभीर अनियमितता एवं कालाबाजारी का अपराध है। 7. उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों के नाम फर्जी बुकिंग दिखाकर सिलेंडरों को बड़ी क़ीमत पर ब्लैक किया जाता है। 8. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में फर्जी नाम से गैस कनेक्शन दिया गया है तथा पात्र महिलाओं को गैस कनेक्शन देने में टाल-मटोल किया जाता है जिस कारण कई महिलाएं योजना के लाभ से बंचित है। उज्ज्वला योजना के समस्त हितग्राहियों की सूची एवं वितरण विवरण सार्वजनिक करायें। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले निःशुल्क चूल्हा एवं सिलेंडर पर हितग्राही से ₹1500 से ₹2000 तक की अवैध वसूली की जाती है। जाँच कर एजेंसी संचालक पर आपराधिक प्रकरण क़ायम कराएं। 9. गैस वितरण नियमों के अनुसार डिलीवरीमैन के पास वजन मापने की मशीन होना अनिवार्य है तथा उपभोक्ता की मांग पर सिलेंडर का वजन तौलकर दिखाना एजेंसी की जिम्मेदारी है, किंतु ऐसा कभी नहीं किया जाता। 10. गैस लीकेज की शिकायत पर एजेंसी द्वारा तत्काल निःशुल्क निरीक्षण एवं मरम्मत सुविधा उपलब्ध कराना नियम है, किंतु उपभोक्ताओं को यह सुविधा नहीं दी जाती। 11. सुरक्षा मानकों के अनुसार प्रत्येक 2 से 5 वर्ष में एजेंसी के मैकेनिक द्वारा उपभोक्ताओं के घर जाकर चूल्हा, पाइप एवं रेगुलेटर की सुरक्षा जांच की जानी चाहिए, परंतु वर्षों से ऐसी कोई जांच नहीं की गईं है यदि किया गया है तो उन उपभोक्ताओं की सूची प्रसारित की जाय। 12. गोदाम में सुरक्षा नियम को दर किनार कर बड़े से छोटे सिलेंडर में गैस रिफिलिंग का विडिओ प्रमाण के साथ शिकायत पर अभी तक बैधानिक कर्यवाही नहीं की गईं। शीघ्र दंडात्मक कार्यवाही करें।