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Home विंध्य प्रदेश सरकार के सामने गिड़गिड़ाए गोयल!—सिंगरौली प्राधिकरण अध्यक्ष की कुर्सी बनी ‘रियलिटी शो’

सरकार के सामने गिड़गिड़ाए गोयल!—सिंगरौली प्राधिकरण अध्यक्ष की कुर्सी बनी ‘रियलिटी शो’

सिंगरौली(ईन्यूज एमपी)-सिंगरौली विकास प्राधिकरण (SDA) के अध्यक्ष पद की नियुक्ति इस बार किसी सरकारी प्रक्रिया से कम और टीवी के किसी रोमांचक रियलिटी शो से ज्यादा लग रही है—जहां कभी नाम घोषित होता है, फिर कैंसल, फिर “वेट एंड वॉच” और आखिर में “फाइनल रिजल्ट”।
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर जैसे ही वीरेंद्र गोयल के अध्यक्ष बनने का “पत्र” वायरल हुआ, वैसे ही बधाइयों की बाढ़ आ गई। नेताओं से लेकर समर्थकों तक सबने मानो शपथ ग्रहण भी करवा दिया। बस कमी थी तो असली आदेश की—जो बाद में पता चला कि अभी ‘प्रोसेस में’ था।
इधर, तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप शाह भी इस पूरे घटनाक्रम को देखकर उतने ही हैरान थे जितना कोई दर्शक फिल्म का क्लाइमेक्स देखकर होता है। उन्हें भी समझ नहीं आया कि कुर्सी गई या अभी ट्रेलर चल रहा है।

वायरल आदेश ने मचाया ‘राजनीतिक मनोरंजन’
बताया जाता है कि जो आदेश वायरल हुआ, वह “आधिकारिक” कम और “क्रिएटिव राइटिंग” ज्यादा निकला। लेकिन तब तक बधाई संदेशों का इतना स्टॉक जमा हो चुका था कि लोग असली-नकली का फर्क भूल बैठे।
कुछ नेताओं ने तो पोस्ट डिलीट करने की जहमत भी नहीं उठाई—कह दिया, “चलो, अब तो असली भी आ गया!”

आखिरकार सरकार ने दी ‘फाइनल कट’
लंबे सस्पेंस के बाद सरकार ने असली आदेश जारी कर दिया। दिलीप शाह की नियुक्ति निरस्त कर वीरेंद्र गोयल को अध्यक्ष बना दिया गया। आज 14 मई को गोयल औपचारिक रूप से कुर्सी संभालेंगे—यानी शो का “ग्रैंड फिनाले” हो चुका है।

अफसरशाही की ‘स्क्रिप्ट राइटिंग’ पर सवाल
पूरे मामले में अफसरों की भूमिका भी चर्चा में है। पुरानी नियुक्तियों को निरस्त करने और नई प्रक्रिया में हुई देरी ने ऐसा कन्फ्यूजन पैदा किया कि असली

आदेश आने से पहले ही ‘जनता का फैसला’ हो गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि आजकल कुर्सी मिलना ही बड़ी बात नहीं है—उससे पहले सोशल मीडिया पर मिल जाना ज्यादा जरूरी हो गया है।और अंत में यही कहा जा सकता है—“सिंगरौली में कुर्सी की राजनीति अब फाइलों में नहीं, वायरल पोस्ट में तय होती है!”

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