सिंगरौली(ईन्यूज एमपी)- जिले में लंबित राजस्व प्रकरणों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर गौरव बैनल ने देवसर तहसील अंतर्गत उज्जैनी, बड़ोखर तथा बरगवां तहसीलदार न्यायालयों का औचक निरीक्षण कर लंबित मामलों की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा सहित अन्य राजस्व प्रकरणों के निराकरण में देरी और लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर ने कड़ा एक्शन लिया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों से लंबित प्रकरणों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मामलों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी आम नागरिकों को सीधे प्रभावित करती है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। राजस्व प्रकरणों के निराकरण में शिथिलता पाए जाने पर प्रभारी नायब तहसीलदार बरगवां नागेश्वर पनिका और प्रभारी नायब तहसीलदार बड़ोखर दिनेश कुमार पनिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। दोनों अधिकारियों को तीन दिवस के भीतर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त हल्का देवरा के पटवारी अजमेर सिंह को गंभीर लापरवाही के चलते निलंबित करने के निर्देश भी जारी किए गए। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सभी प्रकरणों की प्रारंभिक सुनवाई नियमित रूप से की जाए। जिन मामलों में पटवारियों द्वारा समय पर प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है, उनके संबंध में शीघ्र बैठक आयोजित कर समय-सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत कराने की कार्रवाई की जाए। यदि निर्धारित समय में प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो संबंधित पटवारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लंबित मामलों के समय पर निराकरण न होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कलेक्टर ने कहा कि सभी राजस्व प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है। अन्यथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि पूरे विंध्य क्षेत्र में इन दिनों नामांतरण, सीमांकन और बंटवारा जैसे राजस्व प्रकरणों में लापरवाही की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। समय-समय पर ऐसे मामले प्रकाश में आते रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के हौसले बढ़ते रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे परिदृश्य में सिंगरौली कलेक्टर द्वारा लगातार औचक निरीक्षण और त्वरित कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण माना जा रहा है। यह पहल न केवल जिले में कार्यसंस्कृति सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी एक सीख और मिसाल के रूप में देखी जा रही है।