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Home विंध्य प्रदेश JSO पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप: शासन सख्त, कलेक्टर से 28 नवंबर तक मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट

JSO पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप: शासन सख्त, कलेक्टर से 28 नवंबर तक मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट

रीवा(ईन्यूज एमपी)-खाद्य विभाग के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी (JSO) विनीत मिश्रा पर लगे भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों को लेकर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में लगातार हो रही देरी से नाराज़ होकर शासन ने रीवा कलेक्टर को निर्देश दिया है कि वे स्वयं पूरे मामले की जांच करें या किसी आईएएस अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपें। साथ ही 28 नवंबर तक हर हाल में तथ्यात्मक प्रतिवेदन भेजने के सख्त आदेश दिए गए हैं।

उपसचिव ने जताई नाराजगी, कलेक्टर को भेजा पत्र

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उपसचिव बी. के. चंदेल ने 24 नवंबर 2025 को रीवा कलेक्टर को पत्र जारी किया है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि मामले की जांच में अनावश्यक देरी जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाती है, जो शासन स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।

एडीएम की जांच रिपोर्ट न पहुंचने पर कार्रवाई

इस मामले की जांच पहले अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी को सौंपी गई थी, लेकिन कई महीने बीतने के बावजूद उनका प्रतिवेदन शासन तक नहीं पहुंचा। इस लंबी देरी को गंभीर मानते हुए पूरा प्रकरण अब सीधे कलेक्टर के पास भेज दिया गया है।

विधायक अभय मिश्रा ने किए थे गंभीर आरोप

सेमरिया विधायक अभय मिश्रा ने JSO विनीत मिश्रा के खिलाफ भ्रष्टाचार और विभागीय अनियमितताओं से जुड़ी कई शिकायतें दर्ज कराई थीं। विनीत मिश्रा वर्तमान में सिरमौर, जवा और त्योंथर तीनों विकासखंडों के प्रभारी JSO हैं और लंबे समय से अनेक सवालों के घेरे में हैं।

गलत रिपोर्ट से रुका किसानों का भुगतान

आरोपों में सबसे प्रमुख है सेमरिया क्षेत्र के 59 किसानों के भुगतान का मसला। बताया गया है कि करीब 10 महीने से किसानों का पैसा रुका हुआ है। इसका कारण JSO द्वारा भेजी गई कथित गलत रिपोर्ट बताई गई है, जिसके चलते भुगतान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। किसानों को बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

राशन दुकानों पर प्रभाव, बढ़ते सवाल

सूत्रों का कहना है कि अधिकारी का नगर क्षेत्र की कई शासकीय राशन दुकानों पर भी प्रभाव है। इसी कारण उनकी भूमिका पर कई बार सवाल उठते रहे हैं और कई विभागीय मामलों में हस्तक्षेप की शिकायतें सामने आती रही हैं।

28 नवंबर अंतिम तिथि—शासन की सख्ती

शासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट अब किसी भी स्थिति में 28 नवंबर तक भेजना अनिवार्य है। इस निर्देश के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि कलेक्टर स्तर पर अब जांच में तेजी आएगी और आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े निर्णय संभव हैं।

रीवा जिले में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है और अब सबकी नजरें कलेक्टर की ओर से आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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