अधीक्षक पर रेत माफिया का हमला: सरकारी वाहन पर पथराव, दो कर्मचारी घायल — रातभर फैली सनसनी सीधी(ईन्यूज एमपी)-जिले में रेत माफियाओं के बढ़ते आतंक का एक और खौफनाक मामला सामने आया है। सोन घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में रेत माफियाओं ने बुधवार -गुरुवार रात अधीक्षक प्रभात सिंह के सरकारी वाहन पर पथराव कर दिया। इस हमले में वाहन के शीशे चकनाचूर हो गए और दो कर्मचारी घायल हुए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंचे अधिकारी, माफिया हुए हमलावर जानकारी के अनुसार, बुधवार-गुरुवार की रात सोन नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन की सूचना मिलने पर अधीक्षक प्रभात सिंह अपने दल के साथ मौके पर पहुंचे थे। जैसे ही अधिकारी की बोलेरो वाहन सोन नदी के किनारे पहुँची, वहां मौजूद रेत माफियाओं ने पहले गाली-गलौज की और फिर अचानक पथराव शुरू कर दिया।इस हमले में वाहन अनियंत्रित होकर गड्ढे में गिर गया।अधीक्षक किसी तरह जान बचाकर निकले, लेकिन वाहन के शीशे टूट गए और दो वनकर्मी घायल हो गए। पुलिस को सूचना, पर नहीं पहुँचा बल हमले की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई, लेकिन मौके पर कोई बल नहीं पहुंचा। अधिकारी रातभर असुरक्षित स्थिति में रहे। इससे पहले भी सोन नदी के घाटों पर कई बार अवैध खनन की शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, परंतु पुलिस और खनिज विभाग की ओर से कार्रवाई नगण्य रही है। आरोपी माफिया के खिलाफ मामला दर्ज सोन घड़ियाल अभयारण्य सीधी के अधीक्षक की रिपोर्ट पर आरोपियों के खिलाफ धारा 147, 148, 294, 323, 324, 506 और 427 सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों में आधा दर्जन से अधिक लोगों के नाम सामने आए हैं। घटनास्थल पर खड़ी थी माफियाओं की बाइक वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, घटना के वक्त वहां दो मोटरसाइकिलें भी खड़ी मिलीं, जिनके जरिए आरोपी माफिया भाग निकले। वाहन के शीशों पर गहरे निशान और झाड़ियों में पड़े पत्थर इस बात के गवाह हैं कि हमला योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। पुलिस का दावा — क्षेत्र में रेत चोरी नहीं, पर हकीकत कुछ और हालांकि पुलिस प्रशासन लगातार दावा करता रहा है कि जिले में अवैध रेत खनन नहीं हो रहा, लेकिन घटनाएँ कुछ और ही कहानी कहती हैं। सोन नदी के विभिन्न क्षेत्रों में रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों और पिकअप वाहनों से रेत की निकासी खुलेआम जारी है। ग्रामीणों के मुताबिक, रोज़ाना सैकड़ों ट्रैक्टर सोन नदी से रेत भरकर बाहर ले जाते हैं, परंतु पुलिस की गश्त वहाँ नदारद रहती है। मौन मंजूरी’ पर उठ रहे सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह चुप्पी दरअसल रेत माफियाओं के लिए ‘मौन मंजूरी’ का संकेत है। पुलिस और खनिज विभाग की निष्क्रियता के चलते माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे सरकारी अधिकारियों पर भी जानलेवा हमला करने से नहीं चूक रहे। सोन घड़ियाल क्षेत्र में हुई इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि बिना राजनीतिक और तंत्र की छत्रछाया के इतने बड़े पैमाने पर खनन संभव ही नहीं है।