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सीधी में झोलाछाप क्लीनिक पर छापा, 8 बेड पर चल रहा था अवैध अस्पताल!

बहरी में आरके बिन्द क्लीनिक की जांच में खुलासा, आयुर्वेद की डिग्री पर एलोपैथिक इलाज करने का आरोप; जिले में संचालित अन्य अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई को लेकर भी उठे सवाल

सीधी/बहरी(ईन्यूज एमपी)-सीधी जिले के सिहावल ब्लॉक अंतर्गत बहरी क्षेत्र में शनिवार दोपहर करीब 2 बजे स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आरके बिन्द क्लीनिक पर औचक छापेमारी की। बीएमओ डॉ. रिकेश शर्मा के नेतृत्व में हुई जांच के दौरान क्लीनिक के पीछे दो कमरों में आठ बेड लगाकर मरीजों को भर्ती करने और इलाज करने की व्यवस्था सामने आई। विभाग के अनुसार, यहां अस्पताल जैसी व्यवस्था संचालित करने के लिए वैध लाइसेंस या अनुमति नहीं मिली।

जांच में यह भी सामने आया कि क्लीनिक संचालक आरके बिन्द के पास आयुर्वेद की डिग्री है, जबकि उन पर एलोपैथिक पद्धति से मरीजों का इलाज करने का आरोप है। मौके पर मरीजों को ड्रिप चढ़ाने और इंजेक्शन लगाने से संबंधित साक्ष्य भी मिले। स्वास्थ्य विभाग ने व्यवस्थाओं में सुधार के लिए संचालक को एक महीने का समय दिया है। निर्धारित अवधि में सुधार नहीं होने पर क्लीनिक सील करने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

15 साल से चल रहा था इलाज, मरीजों को डिग्री की जानकारी नहीं

बीएमओ डॉ. रिकेश शर्मा के मुताबिक, क्लीनिक में अवैध गतिविधियों और मरीजों की जान से खिलवाड़ किए जाने की शिकायतों के आधार पर जांच की गई। संचालक आरके बिन्द पिछले करीब 15 वर्षों से क्षेत्र में प्रैक्टिस कर रहे हैं। बताया गया कि वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी हैं और बहरी में मकान बनाकर लंबे समय से यहां इलाज कर रहे हैं।

क्लीनिक में इलाज कराने पहुंचीं रामरति विश्वकर्मा ने बताया कि वह पिछले छह वर्षों से यहां उपचार करा रही हैं। तबीयत खराब होने पर उन्हें ड्रिप चढ़ाई जाती है, इंजेक्शन लगाए जाते हैं और दवाएं दी जाती हैं। हालांकि, उन्हें क्लीनिक संचालक की शैक्षणिक योग्यता और डिग्री के बारे में जानकारी नहीं थी।

वहीं, संचालक आरके बिन्द ने स्वीकार किया कि वह करीब 15 वर्षों से मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले उनके पास कोई डिग्री नहीं थी, लेकिन अब उन्होंने आयुर्वेद की डिग्री हासिल कर ली है। उन्होंने दावा किया कि उनके इलाज से अब तक किसी मरीज को नुकसान नहीं पहुंचा है।

एक महीने की मोहलत, फिर सील होगा क्लीनिक?

कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्लीनिक में नियमों के विपरीत मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था, तो इतने लंबे समय तक इस व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हो सकी। खास बात यह भी है कि स्थानीय जानकारी के अनुसार, पूर्व में क्लीनिक के पास ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित था। ऐसे में क्षेत्र में लंबे समय से चल रही इस गतिविधि की जानकारी संबंधित जिम्मेदारों को थी या नहीं, इसकी जांच भी जरूरी है।

बहरी से पूरे जिले तक फैला सवाल

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि बहरी सहित सीधी जिले के कई क्षेत्रों में बिना उचित अनुमति या आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के क्लीनिक और अस्पताल जैसी व्यवस्थाएं संचालित हो रही हैं। बहरी थाने के सामने भी एक कथित झोलाछाप चिकित्सक के क्लीनिक संचालन की बात सामने लाई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित प्रतिष्ठानों की वैधानिक स्थिति की जांच आवश्यक है।

क्षेत्र में पूर्व में कथित अवैध चिकित्सकीय उपचार से मरीजों की मौत होने के दावे भी किए जा रहे हैं। इन मामलों में तथ्यात्मक जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

आरके बिन्द क्लीनिक पर हुई कार्रवाई के बाद अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर हैं। सवाल यह है कि क्या एक महीने की मोहलत के बाद वास्तव में नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा, या कार्रवाई केवल निरीक्षण और चेतावनी तक सीमित रह जाएगी? मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है कि क्लीनिक की वैधानिक स्थिति, संचालक की उपचार संबंधी पात्रता और मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था की जांच नियमानुसार पूरी की जाए। साथ ही, जिले में संचालित अन्य संदिग्ध क्लीनिकों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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