भोपाल (ईन्यूज एमपी)-इंदौर में फर्जी D.Ed-B.Ed डिग्री और अंकसूचियों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 51 शिक्षकों पर अब FIR की तैयारी है। ये शिक्षक करीब 20 साल से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। जांच में इनके शैक्षणिक दस्तावेज संदिग्ध और फर्जी पाए गए हैं। इनमें कई शिक्षक प्रमोशन भी हासिल कर चुके हैं। इन शिक्षकों की वर्तमान मासिक सैलरी करीब 50 हजार से 1 लाख रुपए तक बताई जा रही है। शिक्षा विभाग अब प्रत्येक शिक्षक की सेवा अवधि और नौकरी के दौरान मिले वेतन की गणना कर रहा है। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक वेतन की वसूली की राशि करीब 100 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। मामला सांवेर विकासखंड में वर्ष 2006-07 में हुई संविदा शाला शिक्षक भर्ती से जुड़ा है। शिकायत के बाद दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। माध्यमिक शिक्षा मंडल से जून 2022 से अप्रैल 2023 के बीच मिली जानकारी और चार प्राचार्यों की समिति की मई 2024 की रिपोर्ट में कई अंकसूचियों को लेकर गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जांच में कुछ ऐसी अंकसूचियां मिलीं जिन्हें माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जारी ही नहीं किया था। वहीं कुछ मामलों में एक ही रोल नंबर पर दूसरे परीक्षार्थी की अंकसूची सामने आई। STF भोपाल की जांच में भी संबंधित डिग्रियों को फर्जी पाया गया। सितंबर 2024 में संबंधित संकुल प्राचार्यों को FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस दौरान संबंधित शिक्षक सरकारी सेवा में बने रहे और वेतन लेते रहे। जांच में सामने आए 51 शिक्षकों के पास D.Ed की डिग्री बताई गई है, जबकि करीब 20 शिक्षकों ने B.Ed भी किया है। इनके दस्तावेजों में मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल सहित उज्जैन, देवास और इंदौर के संस्थानों से डिग्री हासिल करने का दावा किया गया है। अब जिला शिक्षा अधिकारी शौर्य मल्होत्रा ने संबंधित संकुल प्राचार्यों और BEO को 51 शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग वेतन की गणना के साथ उसकी वसूली की प्रक्रिया की तैयारी भी कर रहा है। वहीं लोकायुक्त ने मामले में 74 शिक्षकों का रिकॉर्ड तलब किया है। इसमें पहली नियुक्ति से लेकर वर्तमान पदस्थापना तक की जानकारी मांगी गई है। जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति होने के बावजूद इतने वर्षों तक उनका सत्यापन क्यों नहीं हुआ। संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले ज्यादातर शिक्षक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पदस्थ हैं। मामले में किशोर सोलंकी, रेखा चौहान, संदीप मकवाना, वंदना वर्मा, पवन पटेल, महेश परमार, श्याम मेवाड़ा और नवीन पिपलौदिया समेत अन्य शिक्षकों के नाम सामने आए हैं।