भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी के बीच पटवारियों की भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भोपाल में आयोजित पटवारी संघ के जिला अध्यक्षों की बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश के करीब 23 हजार पटवारी स्वामित्व योजना के तहत होने वाली रजिस्ट्री में निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका नहीं निभाएंगे। मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि लीज डीड में पटवारी का नाम शामिल किए जाने पर संघ को आपत्ति है। उनका कहना है कि भविष्य में जमीन को लेकर विवाद होने पर पटवारी को भी कानूनी मामले में पक्षकार बनाया जा सकता है। लीज डीड में नाम शामिल करने पर आपत्ति उपेंद्र सिंह बघेल ने बताया कि इस मामले में कानूनी सलाह भी ली गई है। संघ की मांग है कि पटवारियों को निष्पादक की भूमिका से हटाया जाए। अश्विन सैनी ने कहा कि संघ स्वामित्व योजना का विरोध नहीं कर रहा है, बल्कि पटवारी को निष्पादक बनाने का विरोध है। उनका कहना है कि पटवारी टाइटल्ड अधिकारी नहीं हैं। यदि रजिस्ट्री के बाद कोई व्यक्ति अदालत में यह दावा करता है कि संबंधित जमीन पहले से उसके नाम थी, तो ऐसी स्थिति में पटवारी की भूमिका पर सवाल खड़े हो सकते हैं। सरकार पर 3800 करोड़ से ज्यादा का खर्च राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस पूरी प्रक्रिया पर सरकार के 3,800 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है। प्रदेश में करीब 23 हजार पटवारी हैं और राज्य में प्रतिदिन औसतन 3,500 से 4,000 रजिस्ट्रियां होती हैं। स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया में राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और नायब तहसीलदार को भी शामिल किया गया है। संघ पदाधिकारियों के अनुसार इन अधिकारियों को योजना के तहत पंजीयक के अधिकार दिए गए हैं। क्या है स्वामित्व योजना? केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना वर्ष 2020 से संचालित है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर लंबे समय से काबिज लोगों को उनके संपत्ति अधिकार का दस्तावेज उपलब्ध कराना है। योजना के तहत संबंधित लोगों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए गए हैं। अब राज्य सरकार इसी आबादी भूमि पर काबिज लोगों को अलग से रजिस्ट्री कराकर मुफ्त में मालिकाना हक देने की तैयारी कर रही है। यह योजना पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से संबद्ध है। हरियाणा-राजस्थान का हवाला पटवारी संघ ने हरियाणा और राजस्थान का हवाला देते हुए कहा कि वहां भी अधिकार अभिलेख दिए जा रहे हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में रजिस्ट्री के नाम पर पटवारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। संघ का दावा है कि शासकीय भूमि के निष्पादन का अधिकार अधिकृत अधिकारी को ही होना चाहिए। पटवारी संघ ने साफ किया है कि जब तक पटवारियों को निष्पादक की भूमिका से हटाने पर निर्णय नहीं होता, तब तक वे इस प्रक्रिया में एग्जीक्यूटर के रूप में काम नहीं करेंगे। इससे 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की प्रस्तावित प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका है।