भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्य प्रदेश के 22 सरकारी कॉलेजों पर भवन, हॉस्टल और शौचालयों की मरम्मत के करीब 7.50 करोड़ रुपये के भुगतान का भार आ गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इन कार्यों का भुगतान कॉलेजों की जनभागीदारी निधि से करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच इन कॉलेजों में विभिन्न मरम्मत और रखरखाव के कार्य कराए गए थे। उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने 29 सितंबर को जारी आदेश में सरकारी कॉलेजों के भवन, हॉस्टल और अन्य परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए सरकारी बजट अथवा जनभागीदारी निधि से खर्च की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। बजट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अब कॉलेजों को अपनी जनभागीदारी निधि से पुराने कार्यों का भुगतान करना होगा। विद्यार्थियों की सुविधाओं के लिए इस्तेमाल होती है जनभागीदारी निधि कॉलेजों में जनभागीदारी निधि का इस्तेमाल अब तक विद्यार्थियों की सुविधाओं, खेल गतिविधियों, छोटे-मोटे मरम्मत कार्यों और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में किया जाता रहा है। ऐसे में करोड़ों रुपये के पुराने मरम्मत बिलों का भुगतान इसी निधि से करने के निर्देश मिलने से कॉलेज प्रबंधन के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। 5 लाख तक के काम में प्राचार्य को अधिकार विभाग के निर्देश के अनुसार 5 लाख रुपये तक के सामान्य मरम्मत कार्य जनभागीदारी समिति की अनुशंसा और प्राचार्य की स्वीकृति से कराए जा सकेंगे। एक साल में ऐसे कार्यों पर अधिकतम 50 लाख रुपये तक खर्च किए जा सकते हैं। वहीं 15 लाख रुपये से अधिक के बड़े मरम्मत कार्यों के लिए पीडब्ल्यूडी अथवा पीडब्ल्यूडी की बीआर शाखा से प्रस्ताव और तकनीकी स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। भोपाल के चार कॉलेजों पर 2.26 करोड़ का भार भोपाल के चार सरकारी कॉलेजों में कराए गए कार्यों की राशि करीब 2.26 करोड़ रुपये बताई गई है। सरोजिनी नायडू शासकीय महाविद्यालय में गर्ल्स हॉस्टल की मरम्मत पर 91.12 लाख रुपये, आदर्श मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय में भवन मरम्मत व रंगाई-पुताई पर 63.44 लाख रुपये, एमवीएम कॉलेज में हॉस्टल और शौचालय की मरम्मत पर 25.97 लाख रुपये तथा डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय में भवन-शौचालय मरम्मत पर 45.59 लाख रुपये खर्च हुए हैं। जबलपुर के मोहनलाल हरगोविन्ददास गृहविज्ञान एवं विज्ञान महिला कॉलेज में भी मरम्मत कार्यों की राशि 73.42 लाख रुपये बताई गई है। संबद्धता शुल्क बढ़ने से भी बढ़ेगा आर्थिक दबाव कॉलेजों पर आर्थिक दबाव सिर्फ मरम्मत के भुगतान तक सीमित नहीं है। संबद्धता शुल्क की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। पहले प्रति विषय करीब 5 से 6 हजार रुपये शुल्क देना होता था, जबकि अब बरकतुल्ला विश्वविद्यालय में यह शुल्क प्रति विषय 50 हजार रुपये तक पहुंच गया है। कॉलेजों को इसकी व्यवस्था स्वयं करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में सरकारी कॉलेजों को एक ओर पुराने मरम्मत कार्यों का करोड़ों रुपये का भुगतान जनभागीदारी निधि से करना होगा, वहीं दूसरी ओर बढ़े हुए संबद्धता शुल्क का भार भी उठाना पड़ेगा।चाहें तो मैं इसी खबर का , सीधी24 न्यूज पोर्टल के लिए ज्यादा हार्ड-हिटिंग SEO टाइटल और 2 लाइन की लीड भी बना सकता हूं।