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मध्यप्रदेश में दूसरी बार बदली टेक होम राशन व्यवस्था, आजीविका मिशन से वापस लिया गया जिम्मा

भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश में टेक होम राशन (टीएचआर) योजना के संचालन को लेकर एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण का दायित्व मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एमपीएसआरएलएम) से वापस लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग (डब्ल्यूसीडी) को सौंपने का निर्णय लिया है। यह दूसरी बार है जब इस योजना की जिम्मेदारी एक विभाग से दूसरे विभाग को हस्तांतरित की गई है।

सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश में संचालित सात पोषण आहार संयंत्रों के संचालन की नई रूपरेखा तैयार की जा रही है। इन संयंत्रों के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को टेक होम राशन उपलब्ध कराया जाता है।

पहले भी बदल चुकी है व्यवस्था

टेक होम राशन योजना का संचालन पहले महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन था। बाद में इसे महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार उपलब्ध कराने और आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को सौंपा गया था। इसके तहत स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित उत्पादन इकाइयों में पोषण आहार तैयार कर आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाता रहा। अब सरकार ने एक बार फिर इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंप दी है।

हजारों महिलाओं की आजीविका पर असर की आशंका

इस निर्णय के बाद स्वयं सहायता समूहों और पोषण आहार संयंत्रों से जुड़े हजारों महिला सदस्यों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। इन इकाइयों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में महिलाएं, मजदूर, परिवहन कर्मी और अन्य कर्मचारी जुड़े हुए हैं। जिम्मेदारी बदलने के कारण उनके रोजगार और आय पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

नई व्यवस्था में विभाग करेगा संचालन

नई व्यवस्था लागू होने के बाद टेक होम राशन के उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, भंडारण और वितरण की पूरी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन होगी। विभाग यह तय करेगा कि उत्पादन सरकारी व्यवस्था के माध्यम से होगा या किसी अन्य एजेंसी की सेवाएं ली जाएंगी। इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

योजना का उद्देश्य

टेक होम राशन योजना के तहत छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य कुपोषण कम करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाना है। यह योजना समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) और पोषण अभियान के तहत संचालित की जाती है।

आगे क्या?

सरकार के निर्णय के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि नई व्यवस्था कब से पूरी तरह लागू होगी और वर्तमान में कार्यरत स्वयं सहायता समूहों तथा पोषण आहार संयंत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इस बदलाव से टेक होम राशन की गुणवत्ता और समय पर वितरण व्यवस्था में कितना सुधार आता है।

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