संयुक्त आयुक्त से लेकर विकासखंड अधिकारी तक हुए पदोन्नत, सरकार ने जारी किए चार अलग-अलग आदेश; पदस्थापना आदेश अलग से होंगे जारी भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश सरकार ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों की प्रक्रिया को तेज करते हुए 121 अधिकारियों को बड़ी सौगात दी है। विभाग ने चार अलग-अलग आदेश जारी कर संयुक्त आयुक्त (विकास), उपायुक्त (विकास), मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और विकासखंड अधिकारियों (बीडीओ) को उच्च पदों पर पदोन्नत किया है। सभी पदोन्नतियां अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक स्थानापन्न रूप से प्रभावी रहेंगी। जारी आदेशों के अनुसार 5 संयुक्त आयुक्त (विकास) को अतिरिक्त संचालक के पद पर, 20 उपायुक्त (विकास) को संयुक्त आयुक्त (विकास) के पद पर, 56 मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को उपायुक्त (विकास) तथा 40 विकासखंड अधिकारियों को मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के पद पर पदोन्नत किया गया है। इस प्रकार कुल 121 अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है। पदोन्नति आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी अधिकारी अपने वर्तमान पदस्थापना स्थल पर ही उच्च पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे। उन्हें तत्काल प्रभाव से अपने निम्न पद के कार्यभार से भारमुक्त कर उच्च पद का कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। इन अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश पृथक से जारी किए जाएंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी पदोन्नतियां मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के प्रावधानों के तहत की गई हैं तथा पदोन्नति में आरक्षण संबंधी अधिनियम एवं नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया है। आदेश के अनुसार सभी पदोन्नतियां माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) क्रमांक 13954/2016 तथा भविष्य में सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा पारित किए जाने वाले आदेशों के अधीन रहेंगी। वेतन निर्धारण के लिए पदोन्नत अधिकारियों को आदेश प्राप्त होने की तिथि से एक माह के भीतर अपना विकल्प प्रस्तुत करना होगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी पदोन्नत अधिकारी के विरुद्ध पदोन्नति की तिथि पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई या दंड लंबित पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी की पदोन्नति स्वतः निरस्त मानी जाएगी। प्रदेश में करीब एक दशक बाद बड़े पैमाने पर शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया के तहत विभिन्न विभागों में लगातार आदेश जारी किए जा रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की यह कार्रवाई इसी क्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है, जिससे विभागीय प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।