सीधी(ईन्यूज एमपी)- जिले के रामपुर नैकिन थाना क्षेत्र स्थित सोन नदी के भंवरसेन घाट में हुए दर्दनाक हादसे में डूबे चारों लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। सोमवार को एक युवती का शव मिलने के बाद मंगलवार को एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय गोताखोरों की संयुक्त टीम ने दो अन्य युवतियों एवं एक युवक का शव भी नदी से बाहर निकाल लिया। जानकारी के अनुसार मैहर जिले के रामनगर थाना क्षेत्र से आए कुछ युवक-युवतियां सोमवार को भंवरसेन घाट पिकनिक मनाने पहुंचे थे। इसी दौरान सोन नदी में स्नान करते समय तीन युवतियां गहरे पानी में डूबने लगीं। उन्हें बचाने के प्रयास में एक युवक ने नदी में छलांग लगा दी, लेकिन वह भी तेज बहाव और गहरे भंवर की चपेट में आकर डूब गया। देखते ही देखते खुशियों का माहौल मातम में बदल गया और घाट पर अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार रामपुर नैकिन आशीष मिश्रा, रामपुर नैकिन थाना पुलिस एवं खड्डी चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू कराया। सोमवार को एक युवती का शव घटनास्थल से करीब आधा किलोमीटर दूर नदी में बरामद किया गया था। मंगलवार को कलेक्टर विकास मिश्रा और पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी भी घटनास्थल पहुंचे। उनके मार्गदर्शन में एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों ने सघन तलाश अभियान चलाते हुए शेष तीन शवों को भी बरामद कर लिया। प्रशासन ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतकों की पहचान ज्योति सेन (24) निवासी बूढ़ा बाउर, थाना रामनगर जिला मैहर, सुभि सेन (15) पिता रामदयाल सेन, नीलू बैस (22) पिता लल्लू बैस, दोनों निवासी बूढ़ा बाउर जिला मैहर तथा लखन केवट (26) पिता मोहनलाल केवट निवासी घोगटपुर जिला राजगढ़ के रूप में हुई है। खतरनाक माना जाता है भंवरसेन घाट स्थानीय लोगों के अनुसार सोन नदी का भंवरसेन घाट क्षेत्र गहरे भंवर और तेज बहाव के कारण अत्यंत जोखिमपूर्ण माना जाता है। बावजूद इसके यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग पिकनिक और स्नान के लिए पहुंचते हैं। इस हादसे ने एक बार फिर घाट क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और चेतावनी संकेतों की आवश्यकता को उजागर किया है। हाल ही में छोड़े गए थे मगर और घड़ियाल भंवरसेन घाट सोन नदी का वही क्षेत्र है जहां सोन घड़ियाल अभयारण्य विकसित करने की योजना पर कार्य चल रहा है। कुछ समय पूर्व यहां 14 मगर और घड़ियाल छोड़े गए थे। वहीं पांच दिन पहले भी एक तालाब से रेस्क्यू किए गए मगरमच्छ को इसी क्षेत्र में छोड़ा गया था। ऐसे में यह इलाका वन्यजीवों की दृष्टि से भी संवेदनशील माना जा रहा है।