परिवहन विभाग की व्यवस्था पर सवाल, शुल्क वसूली जारी लेकिन स्मार्ट कार्ड गायब भोपाल(ईन्यूज एमपी)-मध्यप्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) के स्मार्ट कार्ड प्रिंटिंग का संकट लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश के लाखों वाहन चालक और नए वाहन खरीदार महीनों से अपने DL और RC कार्ड का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन परिवहन विभाग अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया है। स्थिति यह है कि कई जिलों में पिछले करीब 20 महीनों से कार्ड प्रिंटिंग प्रभावित है। कहीं स्मार्ट कार्ड की कमी है तो कहीं प्रिंटिंग कार्ट्रिज खत्म होने से काम ठप पड़ा है। इसके बावजूद आवेदकों से कार्ड शुल्क और डाक शुल्क लगातार वसूला जा रहा है। जानकारी के अनुसार, परिवहन विभाग की स्मार्ट कार्ड प्रिंटिंग व्यवस्था निजी एजेंसी “स्मार्ट चिप कंपनी” के भरोसे चल रही थी। कंपनी का अनुबंध खत्म होने और भुगतान विवाद के चलते अक्टूबर 2024 से कई स्थानों पर काम बंद हो गया। विभाग ने नई एजेंसी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की, लेकिन अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर समेत कई आरटीओ कार्यालयों में हजारों आवेदन लंबित पड़े हैं। दीपावली और नए साल के दौरान खरीदे गए वाहनों के RC कार्ड तक लोगों को नहीं मिल पाए। वहीं रोजाना सैकड़ों नए ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन भी पेंडिंग में चले गए। परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि कार्ड नहीं मिलने के बावजूद लोगों से प्रति कार्ड लगभग 200 रुपए तक शुल्क लिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केवल 10 महीनों में विभाग ने करोड़ों रुपए की वसूली कर ली, जबकि आवेदकों को स्मार्ट कार्ड उपलब्ध नहीं कराए गए। हालांकि विभाग का तर्क है कि डिजिटल RC और डिजिटल DL अब वैध दस्तावेज हैं और इन्हें DigiLocker तथा mParivahan ऐप पर देखा जा सकता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और कम डिजिटल जानकारी रखने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था परेशानी का कारण बन रही है। कई वाहन मालिकों का कहना है कि बैंक, बीमा कंपनियां और कुछ जगहों पर जांच एजेंसियां अब भी फिजिकल कार्ड की मांग करती हैं। प्रदेशभर में वाहन मालिकों और आवेदकों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कई लोग महीनों तक आरटीओ और वाहन डीलरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। सोशल मीडिया पर भी RC और DL कार्ड नहीं मिलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द नई प्रिंटिंग एजेंसी तय नहीं की गई और सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई, तो आने वाले समय में लंबित मामलों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।फिलहाल परिवहन विभाग डिजिटल व्यवस्था को समाधान बता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर लाखों लोग अब भी अपने “असली कार्ड” का इंतजार कर रहे हैं।