भोपाल(ईन्यूज एमपी)-मध्यप्रदेश सरकार ने बढ़ते ईंधन खर्च और राजकोषीय बोझ को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल के बाद अब प्रदेश के 11 हजार से अधिक शासकीय वाहनों के उपयोग पर सख्ती की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत मंत्रियों और अधिकारियों के काफिलों को छोटा किया जाएगा और फिजूलखर्ची पर रोक लगाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कारकेड में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी है। उनके इस कदम के बाद उप-मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिलों से अतिरिक्त ‘पायलट’ और ‘फॉलो’ वाहन हटा दिए हैं। सरकार ने मंत्रियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे भी ईंधन और संसाधनों में स्वेच्छा से कटौती करें। भोपाल में सबसे ज्यादा सरकारी वाहन राजधानी भोपाल में सरकारी वाहनों की संख्या सबसे अधिक है। प्रदेश के कुल 11 हजार वाहनों में से करीब 8 हजार वाहन भोपाल में ही संचालित हैं। इन वाहनों के लिए हर महीने लगभग 24 हजार लीटर डीजल की खपत हो रही है, जो सरकारी खर्च का बड़ा हिस्सा है। ईंधन सीमा तय, लेकिन दौरे पर खुली छूट वर्तमान व्यवस्था के तहत कैबिनेट मंत्री को प्रतिमाह 250 लीटर और राज्य मंत्री को 220 लीटर ईंधन की पात्रता है। हालांकि जिलों के दौरे के दौरान खर्च पर कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है, जिससे खर्च बढ़ने की आशंका बनी रहती है। राज्य सरकार ने खर्च में कटौती के लिए चार अहम निर्णय लिए हैं— * पुलिस, राजस्व और वन विभाग को छोड़कर अन्य विभागों में नई गाड़ियों की खरीद पर रोक * पेट्रोल-डीजल वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा * शासकीय अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर रोक जारी * कम ईंधन खपत वाले वाहनों के उपयोग हेतु नई गाइडलाइन जल्द सरकार के इस फैसले से न केवल राजस्व की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से प्रदूषण कम होगा, वहीं छोटे काफिलों से वीआईपी मूवमेंट के कारण लगने वाले ट्रैफिक जाम में भी कमी आएगी।वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने बताया कि सरकार पहले से ही मितव्ययिता की दिशा में काम कर रही है। जरूरत पड़ने पर और सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले आठ महीनों से विदेश यात्राओं की अनुमति नहीं दी गई है और ईवी उपयोग को बढ़ाने की दिशा में भी गाइडलाइन जारी की जा चुकी है।