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दिल्ली दरबार में मंथन तेज: एमपी कैबिनेट विस्तार की आहट, कई मंत्रियों पर लटक सकती है तलवार

नई दिल्ली/भोपाल(ईन्यूज एमपी)-मध्यप्रदेश में लंबे समय से चल रही कैबिनेट विस्तार की अटकलों ने अब तेजी पकड़ ली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिल्ली दौरा इन चर्चाओं को और हवा दे रहा है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री आज संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर राज्य के राजनीतिक हालात, संगठनात्मक समीकरण और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश में जल्द ही कैबिनेट विस्तार किया जा सकता है। इस दौरान प्रदर्शन और विवादों के आधार पर कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी तय मानी जा रही है, जबकि नए चेहरों को मौका देने की रणनीति पर काम हो रहा है।

क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने पर जोर

भाजपा इस बार कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को प्राथमिकता देने की तैयारी में है। पार्टी का फोकस ऐसे वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने पर है, जो अब तक अपेक्षाकृत उपेक्षित रहे हैं। इसी कड़ी में विंध्य क्षेत्र को विशेष महत्व दिए जाने की चर्चा है।

विंध्य से रीती पाठक का नाम आगे

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विंध्य क्षेत्र से वरिष्ठ भाजपा नेता और दो बार की सांसद रह चुकीं रीती पाठक को मंत्री बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।

बिहार मॉडल की तर्ज पर रणनीति

सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस बार बिहार मॉडल की तर्ज पर सामाजिक समीकरण साधने की तैयारी में है। इसमें विभिन्न जातीय समूहों, पिछड़े वर्गों और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को संतुलित करते हुए कैबिनेट का गठन किया जा सकता है, जिससे आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए मजबूत राजनीतिक संदेश दिया जा सके।

ज्योतिषीय गणनाओं पर भी नजर

राजनीतिक निर्णयों के समय को लेकर ज्योतिषीय पहलुओं पर भी चर्चा जारी है।

* 14 मई को पंचक समाप्त
* 15 मई को शिव चतुर्दशी
* 16 मई को वट अमावस्या
* 17 मई से अधिक मास प्रारंभ

ऐसे में अधिक मास शुरू होने से पहले कैबिनेट विस्तार का निर्णय लिया जा सकता है।


कभी भी हो सकता है बड़ा ऐलान

दिल्ली में जारी बैठकों के बाद कभी भी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर औपचारिक घोषणा हो सकती है। प्रदेश की राजनीति में यह फैसला न केवल सत्ता संतुलन बल्कि आगामी रणनीति के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे ने यह साफ संकेत दे दिया है कि मध्यप्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। अब सबकी नजरें केंद्रीय नेतृत्व के फैसले और संभावित कैबिनेट विस्तार पर टिकी हैं, जो प्रदेश की सियासत में नया समीकरण तय कर सकता है।

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