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वाह रे रेलवे! ट्रेन चलने से पहले ही भविष्य में पहुंच गया आदेश, अधिकारी के हस्ताक्षर ने खोली सिस्टम की पोल!

सीधी (सचीन्द्र मिश्र)-सीधी से रीवा के बीच मेमू ट्रेन चलाने की खबर विंध्यवासियों के लिए राहत भरी हो सकती है, लेकिन रेलवे बोर्ड के नाम से सामने आए आदेश ने एक अलग ही सवाल खड़ा कर दिया है। आदेश में ट्रेन सेवा 24 अक्टूबर 2026 से शुरू करने की मंजूरी दी गई है और नीचे आदेश जारी होने की तारीख भी 24 अक्टूबर 2026 ही दर्ज है। जबकि आज 21 अक्टूबर है।

अब सवाल यह है कि जब आदेश की तारीख आने में अभी तीन दिन बाकी हैं, तो यह आदेश आज ही कैसे सामने आ गया? क्या रेलवे के अधिकारी भविष्य में पहुंच गए हैं, या फिर फाइलों में तारीखें भी अपनी मर्जी से चलती हैं?

कमाल देखिए! रेलवे में ट्रेन भले ही अपने निर्धारित समय से चले या लेट हो जाए, लेकिन आदेश समय से पहले ही पटरी पर उतर गया!

जिस अधिकारी के हस्ताक्षर आदेश पर दिखाई दे रहे हैं, क्या उन्होंने तारीख देखे बिना हस्ताक्षर कर दिए? क्या यह भविष्य की तारीख में तैयार किया गया अग्रिम आदेश है, जिसे गलती से पहले सार्वजनिक कर दिया गया? या फिर दस्तावेज की तारीख में कोई तकनीकी अथवा लिपिकीय त्रुटि है? इन सवालों का जवाब रेलवे को ही देना चाहिए।

आमतौर पर आम आदमी बैंक की एक तारीख गलत भर दे तो उसे कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। सरकारी दफ्तर में किसी आवेदन पर तारीख गलत हो जाए तो फाइल अटक सकती है। लेकिन यहां तो मामला रेलवे बोर्ड के आदेश का है, जहां तारीख ही भविष्य की लिखी हुई है!

जनता को ट्रेन का इंतजार रहता है, लेकिन यहां तो जनता से पहले आदेश ही भविष्य की यात्रा पर निकल पड़ा!

सीधी-रीवा रेल सेवा विंध्य क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से जुड़ी उम्मीदों का विषय है। ऐसे महत्वपूर्ण मामले में आदेश की तारीख को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसलिए रेलवे को स्पष्ट करना चाहिए कि आदेश वास्तव में कब जारी हुआ और 24 अक्टूबर की तारीख दर्ज होने के पीछे क्या वजह है।

फिलहाल तस्वीर यही सवाल पूछ रही है—रेलवे की ट्रेन समय पर चलेगी या नहीं, यह तो बाद की बात है; लेकिन रेलवे का आदेश आखिर भविष्य से वर्तमान में कैसे पहुंच गया?

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