भोपाल(ईन्यूज एमपी)-मध्यप्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग के बीच आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है। कोयले की आपूर्ति में संभावित बाधा, बारिश की कमी और बिजली उत्पादन इकाइयों में तकनीकी खराबी के चलते प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए बंद पड़ी इकाइयों को दोबारा चालू करने की कवायद से फिलहाल राहत मिली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 17 अक्टूबर को प्रदेश में बिजली की मांग के अनुरूप करीब 16,975 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 12,685 मेगावाट था। यह अंतर बताता है कि प्रदेश में बिजली की जरूरत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में मांग के अनुरूप पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना ऊर्जा विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। बिजली उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों के तहत खंडवा थर्मल पावर प्लांट की कुल 1,200 मेगावाट क्षमता वाली दो इकाइयों को दोबारा चालू किया गया। इसके अलावा बीरसिंहपुर, जेपी बीना, लेनको पावर और एनटीपीसी मोहदा की कुछ इकाइयों से भी उत्पादन बहाल करने की दिशा में काम किया गया है। इन इकाइयों के चालू रहने से बिजली की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। प्रदेश में कम बारिश के कारण जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। वहीं, ताप विद्युत संयंत्रों के संचालन के लिए पर्याप्त कोयले की उपलब्धता जरूरी है। यदि कोयले की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो बिजली उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है। सौर ऊर्जा से दिन के समय बिजली की उपलब्धता बढ़ती है, लेकिन मांग और उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों के बीच आने वाले दिनों में बिजली उत्पादन इकाइयों की स्थिति, कोयले की उपलब्धता और मांग के अनुसार आपूर्ति पर नजर रहेगी। फिलहाल बिजली कटौती को लेकर किसी व्यापक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था में निरंतर सुधार प्रदेश के लिए जरूरी है।