सीधी (ईन्यूज एमपी)-सीधी जिले में शासकीय चिकित्सकों द्वारा निजी प्रैक्टिस किए जाने को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार खरे ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। सीएमएचओ कार्यालय से जारी आदेश में जिले के सभी विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी, नियमित एवं संविदा चिकित्सकों सहित जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ चिकित्सकों को शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। आदेश में मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के 7 अगस्त 2013 के आदेश का हवाला देते हुए निजी प्रैक्टिस के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस पर रोक निर्देश के अनुसार चिकित्सक निजी प्रैक्टिस केवल अपने कर्तव्य की अवधि के बाहर ही कर सकेंगे। शासकीय चिकित्सक अपने निवास पर निजी प्रैक्टिस के तहत केवल परामर्श सेवाएं दे सकेंगे। वे अपने या परिजन के नाम से क्लीनिक, नर्सिंग होम या निजी चिकित्सालय संचालित नहीं कर सकेंगे। साथ ही परामर्श सेवाएं पदस्थापना मुख्यालय पर ही देने की बात कही गई है। निजी अस्पताल या नर्सिंग होम में प्रैक्टिस की अनुमति नहीं शासकीय चिकित्सक किसी निजी नर्सिंग होम, निजी चिकित्सालय या प्राइवेट क्लीनिक में जाकर किसी भी प्रकार की प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। ऐसे संस्थानों में परामर्श सेवाएं देना भी प्रतिबंधित रहेगा। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चिकित्सक अपने निवास पर केवल मूलभूत उपकरणों, जैसे स्टेथोस्कोप, बीपी इंस्ट्रूमेंट, ऑर्थोस्कोप, ईसीजी मशीन आदि का उपयोग परामर्श के लिए कर सकेंगे। एक्स-रे, सोनोग्राफी जैसे उपकरणों पर भी रोक ऐसे उपकरण जिनके लिए अलग लाइसेंस की आवश्यकता होती है, जैसे एक्स-रे मशीन, यूएसजी और इकोकार्डियोग्राफी मशीन आदि, उन्हें चिकित्सक अपने निवास पर अपने नाम से पंजीकृत नहीं करा सकेंगे। इसके अलावा अपने निवास पर किसी अन्य व्यक्ति या परिजन के नाम से स्थापित अथवा पंजीकृत उपकरणों पर भी कार्य करना और उसकी रिपोर्टिंग करना प्रतिबंधित किया गया है। आदेश में डेंटल चेयर, गामा मशीन सहित अन्य ऐसे उपकरणों को भी निजी प्रैक्टिस के लिए चिकित्सक के निवास पर रखने पर रोक बताई गई है। पैथोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जांच के लिए भी निजी प्रैक्टिस के तहत कोई उपकरण रखने की अनुमति नहीं होगी। नियम तोड़ा तो विभागीय कार्रवाई सीएमएचओ ने आदेश में स्पष्ट किया है कि उपरोक्त व्यवस्था का उल्लंघन मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 18 के उपनियम (4) का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत दंडनीय कार्रवाई की जा सकती है। सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार खरे ने सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक तथा जिले के सभी संबंधित मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आदेश की प्रति सभी अधीनस्थ विशेषज्ञों एवं चिकित्सा अधिकारियों को उपलब्ध कराकर इसका पालन सुनिश्चित कराएं। साथ ही जिला जनसंपर्क विभाग को भी आदेश के अनुसार समाचार निःशुल्क प्रकाशित कराने के लिए सूचना भेजी गई है।