सीधी(ईन्यूज एमपी)-जिले के मझौली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत दादर के जोगीपहाड़ी गांव में रविवार सुबह दो साकेत परिवारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जमीनी एवं रास्ते के विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। आरोप है कि विवाद के चलते एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष के खपरैल मकान में आग लगा दी, जिसके बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने मझौली-मड़वास मार्ग पर चक्का जाम कर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। पीड़ित पक्ष के अवधेश साकेत का आरोप है कि रास्ते के चौड़ीकरण को लेकर दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इस संबंध में उन्होंने 18 एवं 19 जून को पथरौला चौकी में शिकायत भी दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि शिकायत पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते रविवार सुबह करीब 5:30 से 6 बजे के बीच आरोपियों ने महिलाओं को आगे कर उनके घर में आग लगा दी। घटना की जानकारी मिलते ही मड़वास थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दमकल वाहन को बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक घर में रखा घरेलू सामान जलकर राख हो चुका था। आगजनी से पीड़ित परिवार को भारी आर्थिक नुकसान होने की बात सामने आई है। घटना से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जोगीपहाड़ी में मझौली-मड़वास मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित रहा और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी अतर सिंह एवं संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों से चर्चा की। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने चक्का जाम समाप्त कर मार्ग बहाल कर दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है तथा आरोपियों की तलाश की जा रही है। साथ ही आगजनी से हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है। गौरतलब है कि जोगीपहाड़ी में दोनों साकेत परिवारों के बीच जमीनी और रास्ते को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था तथा कई बार पुलिस से शिकायत भी की गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती तो मामला इतना गंभीर रूप नहीं लेता। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व कमर्जी थाना क्षेत्र में भी इसी प्रकार के विवाद ने तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी थी। ऐसे मामलों में समय रहते प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता एक बार फिर सामने आई है।