सीधी(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश शासन द्वारा नोटरीकृत दस्तावेजों पर देय स्टाम्प शुल्क की दरों में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब शपथ-पत्र (एफिडेविट) सहित विभिन्न नोटरी दस्तावेजों पर पूर्व की तुलना में अधिक स्टाम्प शुल्क देय होगा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी विकास मिश्रा ने जिले के सभी नोटरी अधिवक्ताओं को संशोधित प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। जारी निर्देशों के अनुसार नोटरी द्वारा सत्यापित किए जाने वाले शपथ-पत्रों तथा इसी प्रकार के अन्य दस्तावेजों पर अब 50 रुपये के स्थान पर 200 रुपये का स्टाम्प शुल्क अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा। इसी प्रकार अन्य विनिर्दिष्ट दस्तावेजों पर पूर्व में देय 1000 रुपये के स्टाम्प शुल्क को बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया है। शासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुरूप अब सभी दस्तावेजों का निष्पादन और प्रमाणीकरण संशोधित शुल्क दरों के आधार पर ही किया जाएगा। कलेक्टर विकास मिश्रा ने कहा है कि स्टाम्प शुल्क केवल राजस्व प्राप्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि किसी दस्तावेज की वैधानिकता और विधिक मान्यता सुनिश्चित करने का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित शुल्क से कम मूल्य के स्टाम्प पर तैयार किए गए दस्तावेज नियमों के अनुरूप नहीं माने जाएंगे और ऐसे मामलों में संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन द्वारा यह भी कहा गया है कि नोटरी अधिवक्ता अपने कार्यालयों में आने वाले नागरिकों को संशोधित स्टाम्प शुल्क की जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि दस्तावेज तैयार कराने के दौरान किसी प्रकार की असुविधा या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। साथ ही सभी नोटरीगण को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि भविष्य में प्रत्येक दस्तावेज निर्धारित शुल्क के अनुरूप ही तैयार और प्रमाणित किया जाए। जिला अधिवक्ता संघ सीधी से भी अपेक्षा की गई है कि वह अपने सदस्यों तथा नोटरी अधिवक्ताओं को शासन द्वारा किए गए संशोधनों की जानकारी प्रदान करे और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग करे। इससे न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों में एकरूपता और पारदर्शिता बनी रहेगी। कलेक्टर ने जिले के नागरिकों से भी अपील की है कि वे शपथ-पत्र, घोषणा-पत्र अथवा अन्य नोटरीकृत दस्तावेज तैयार कराते समय संशोधित स्टाम्प शुल्क का उपयोग करें। यदि किसी स्तर पर निर्धारित शुल्क से कम मूल्य के स्टाम्प का उपयोग किए जाने या अन्य प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना संबंधित राजस्व अधिकारियों को दें। प्रशासन का मानना है कि संशोधित स्टाम्प शुल्क व्यवस्था लागू होने से दस्तावेजों की वैधानिक प्रक्रिया अधिक मजबूत होगी, राजस्व संरक्षण सुनिश्चित होगा तथा भविष्य में कानूनी विवादों की संभावनाओं को भी कम किया जा सकेगा।