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कुसमी वनांचल में मां कोटमहिन की महिमा, नवरात्र में हो रही विशेष पूजा-अर्चना

सीधी(ईन्यूज एमपी)- जिले के वनांचल क्षेत्र कुसमी अंतर्गत संजय टाइगर रिजर्व के कोटमा पहाड़ में विराजमान मां कोटमहिन की आस्था आज भी हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। चैत्र नवरात्र के अवसर पर यहां आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना कर रहे हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार मां कोटमहिन की महिमा अपार है। आदिवासी समाज के पूर्वजों के समय शैला और कर्मा गीतों के दौरान माता के प्रकट होकर नृत्य करने की कथाएं आज भी लोगों के बीच प्रचलित हैं। इन घटनाओं की जानकारी गांव के बैगा, जो पूजा-अर्चना करते हैं, उन्हें होती थी।

मां के दरबार तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को दो पहाड़ पार कर मिढुली तक जाना पड़ता है। बताया जाता है कि हजारों वर्षों से क्षेत्रीय लोग यहां पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। गांव के हर घर में चौरा बनाकर मां को विराजमान किया जाता है और नियमित पूजा की जाती है।

ग्रामीणों के अनुसार जब भी गांव में किसी प्रकार की बीमारी फैलती है, तो लोग मां को याद कर विशेष पूजा करते हैं और एक गांव से दूसरे गांव तक माता का आह्वान कर बीमारी को विदा करने की परंपरा निभाते हैं।

चैत्र नवरात्र के दौरान सुबह से शाम तक पूजा-पाठ का क्रम चलता है। ज्वारे विसर्जन के समय भी सबसे पहले देवी को चढ़ावा अर्पित किया जाता है, इसके बाद पूरे गांव में भ्रमण कराया जाता है।

वनांचल क्षेत्र में मां कोटमहिन के प्रति आस्था और परंपरा का यह अनूठा संगम आज भी लोगों की गहरी धार्मिक भावना और संस्कृति को जीवंत बनाए हुए है।

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