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Home सीधी दर्पण बड़ी खबर: सीधी में सीएम का बड़ा एक्शन: कलेक्टर हटे, बैंक महाप्रबंधक निलंबित, गुना SP भी हटे!

बड़ी खबर: सीधी में सीएम का बड़ा एक्शन: कलेक्टर हटे, बैंक महाप्रबंधक निलंबित, गुना SP भी हटे!

भोपाल (ईन्यूज़ एमपी)। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के सीधी जिले के आकस्मिक दौरे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा एक्शन देखने को मिला है। दौरे के दौरान आम जनता, जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों से मिली लगातार शिकायतों और फीडबैक के आधार पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इसी क्रम में जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक पी.एस. धनवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश जारी किए गए हैं, वहीं सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को भी उनके पद से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई जिले में लंबे समय से अधिकारियों के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों और बढ़ते असंतोष के बीच की गई है।
सिर्फ सीधी ही नहीं, बल्कि गुना जिले में भी प्रशासनिक सख्ती देखने को मिली है। वहां तलाशी के दौरान बरामद नकद राशि के कथित हेरफेर मामले में पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी की भूमिका को संतोषजनक नहीं मानते हुए उन्हें भी तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि सरकार अब किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है।
सीधी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की, जहां उन्हें अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यशैली को लेकर कई गंभीर शिकायतें प्राप्त हुईं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो अधिकारी मैदान में रहकर काम नहीं करना चाहते, वे बल्लभ भवन में बैठें। मुख्यमंत्री का यह बयान सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र को सख्त संदेश देने वाला माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कई महीनों से सीधी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज को लेकर जनप्रतिनिधियों और आम जनता के बीच असंतोष बना हुआ था। भाजपा पदाधिकारियों द्वारा भी समय-समय पर इसका विरोध दर्ज कराया गया था, यहां तक कि प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में भी यह मुद्दा सामने आ चुका था। लगातार मिल रही शिकायतों और जमीनी हकीकत के फीडबैक ने आखिरकार इस बड़े प्रशासनिक एक्शन का रूप ले लिया।
इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में और भी जिलों में इस तरह की समीक्षा और कार्रवाई देखने को मिल सकती है। मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख को प्रशासनिक कसावट और जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे यह संदेश स्पष्ट गया है कि शासन अब जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए पूरी तरह गंभीर है।

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