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Home सीधी दर्पण सीधी में मंत्री बनाम कार्यकर्ता: शिकायत सुनते ही गरमाया माहौल, DEO पर साढ़े चार करोड़ के खेल का आरोप..?

सीधी में मंत्री बनाम कार्यकर्ता: शिकायत सुनते ही गरमाया माहौल, DEO पर साढ़े चार करोड़ के खेल का आरोप..?

सीधी(ईन्यूज एमपी)-जिले के प्रवास पर आए प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल की मौजूदगी में आयोजित बीजेपी प्रबंध समिति की बैठक उस समय चर्चा और तंज का विषय बन गई, जब कार्यकर्ताओं ने जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ शिकायत रख दी। शिकायत सुनते ही बैठक का माहौल ऐसा बदला कि संगठन की बैठक कुछ देर के लिए सवाल-जवाब और तकरार के अखाड़े में बदल गई।

बैठक में एक वरिष्ठ नेता ने जिला शिक्षा अधिकारी पी.के. सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिले के करीब 90 स्कूलों से 5 लाख रुपये की दर से लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये की राशि में अनियमितता की गई है। कार्यकर्ताओं ने उम्मीद की थी कि प्रभारी मंत्री इस शिकायत को गंभीरता से सुनेंगे, लेकिन जैसे ही मामला उठा, मंत्री जी का मूड ही बदल गया।

बताया जाता है कि शिकायत सुनते ही प्रभारी मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कार्यकर्ता से कहा कि ऐसी शिकायतें सीधे उनसे न करें। उन्होंने सलाह दी कि स्थानीय समस्याओं के लिए सांसद और विधायक ही उपयुक्त माध्यम हैं। यानी साफ शब्दों में कहें तो कार्यकर्ताओं को समझा दिया गया कि “मंत्री जी तक पहुंचने के लिए पहले कुछ और दरवाजे खटखटाने होंगे।”

इसी बात को लेकर बैठक में गहमागहमी शुरू हो गई। आरोप यह भी लगे कि मंत्री द्वारा कार्यकर्ताओं से अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे नाराज होकर कुछ कार्यकर्ता बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। बाहर निकलते ही कुछ कार्यकर्ताओं ने मीडिया के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए यहां तक कह दिया कि “हमें ऐसा मंत्री नहीं चाहिए।”

मंत्री के इस रवैये से बैठक में मौजूद अन्य कार्यकर्ता भी असहज नजर आए और कुछ ने पलटकर जवाब भी दे दिया। नतीजा यह रहा कि संगठनात्मक बैठक कुछ देर के लिए राजनीतिक असंतोष का मंच बन गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

इस दौरान प्रभारी मंत्री ने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि अब स्थानीय समस्याओं का समाधान सांसद और विधायक स्तर पर ही किया जाएगा। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी पर लगे साढ़े चार करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपों पर जब मीडिया ने सवाल किया तो मंत्री जी का जवाब भी उतना ही गोलमोल रहा, जितना बैठक का माहौल।

अब जिले की राजनीतिक गलियारों में चर्चा यही है कि जब अपने ही कार्यकर्ताओं की शिकायत सुनने में इतनी असहजता हो जाए, तो फिर आम जनता की समस्याओं की सुनवाई किस दरवाजे पर होगी। फिलहाल DEO पर लगे आरोपों की सच्चाई क्या है, यह जांच का विषय है, लेकिन बैठक में हुई नोकझोंक ने जिले की राजनीति में नया मसाला जरूर दे दिया है।

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