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ऊंट के मुंह में जीरा? मनरेगा में मजदूरों को 103 रुपये प्रतिदिन मजदूरी

सीधी(ईन्यूज एमपी)- जिले के कुसमी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत अमरोला के अमराडंडी गांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत स्वीकृत कपिलधारा कूप निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही और पंचायत स्तर की अनदेखी के कारण मजदूरों के अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है। उन्हें मात्र 103 रुपए के मान से मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है जिसे ऊंट के मुंह में जीरा कहा जा सकता है।

जानकारी के अनुसार हितैसी कपिलधारा कूप निर्माण कार्य रामदासिया पति मणिराज सिंह के नाम से स्वीकृत हुआ है। इस कूप निर्माण की कुल स्वीकृत लागत करीब 3.16 लाख रुपये बताई जा रही है, जिसमें से अब तक लगभग 1.25 लाख रुपये की राशि आहरित भी कर ली गई है।

मस्टर रोल के अनुसार मजदूरों को बेहद कम मजदूरी मिलने का मामला सामने आया है। मस्टर रोल संख्या 8651 में 10 मजदूरों को प्रतिदिन 103 रुपये के हिसाब से कुल 722 रुपये मजदूरी दी गई है, जबकि मस्टर रोल संख्या 8652 में 5 मजदूरों को भी इसी दर से भुगतान किया गया है। 7 फरवरी को जब मजदूरी का भुगतान मजदूरों के खातों में पहुंचा तो उनमें भारी असंतोष फैल गया। मजदूरों का कहना है कि इतनी कम मजदूरी में उनका गुजारा संभव नहीं है, जिसके कारण कई लोग अब पलायन की तैयारी कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई ऐसे मजदूरों के नाम मस्टर रोल में दर्ज कर दिए गए हैं जिन्होंने काम ही नहीं किया, जबकि वास्तविक मजदूरों से पंचायत कर्मियों द्वारा बैंक से पैसा निकलवाकर हिस्सा लेने की बात भी सामने आ रही है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण कार्य का मूल्यांकन करने वाले इंजीनियर कभी मौके पर नहीं आते और घर बैठे ही मूल्यांकन कर दिया जाता है। इससे कार्य की गुणवत्ता और मजदूरों की वास्तविक मजदूरी दोनों प्रभावित हो रही हैं।

इस मामले में जब रोजगार सहायक गंगा यादव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह हितैसी कूप है और लाभार्थी अपने हिसाब से काम कराते हैं। जिन मजदूरों के नाम दिए जाते हैं, उसी आधार पर मांग लगाई जाती है और जितना काम किया जाता है उसी के अनुसार मजदूरी का भुगतान होता है। अब अगर इन महोदय की मानें तो सरकारी पैसा है तो इनकी जवाबदेही नहीं है।काम सही हो रहा है या नहीं यह भी इनकी जवाबदेही नहीं है।

हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव और रोजगार सहायक की लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण योजना का लाभ गरीब मजदूरों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि मजदूरों को उनका हक मिल सके और सरकारी योजनाओं में हो रही गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सके।

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