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सिहावल क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल, बिना डिग्री इलाज से लोगों की जान पर खतरा ...

सीधी/सिहावल जिले के सिहावल क्षेत्र में लंबे समय से झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला बना हुआ है। गली-मोहल्लों और गांवों में कुकुरमुत्तों की तरह अवैध क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जहां बिना किसी मान्यता और डिग्री के ग्रामीणों का इलाज किया जा रहा है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर ये झोलाछाप डॉक्टर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है जिस कारण झोलाछाप डॉक्टरों का मनोबल दिनरात चौगुना फलफूल रहा है । स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां बिना डिग्री के इलाज कराने से मरीजों की हालत बिगड़ी और कुछ लोगों की जान भी चली गई। इसके बावजूद इन पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई के लिए टीम गठित होने की बात कही जाती है, लेकिन वह केवल कागजों तक ही सीमित दिखाई देती है।

इसी तरह का एक मामला सिहावल क्षेत्र में सामने आया है, जहां एक तथाकथित बंगाली डॉक्टर निखिल बंगाली पिछले करीब छह वर्षों से कथित रूप से बिना किसी डिग्री के बंद कमरे में इलाज कर रहा है। बताया जाता है कि उसके पास आसपास के कई गांवों जैसे बल्हैया, चितबरिया, रामपुर, केशाउली, मेहरौली, गेरुआ और सिमरिया से भी मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं की बार एक बंगाली डाक्टर भी इन क्षेत्रों में जाते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि बमुरी गांव में रामसिया साकेत के पुत्र गणेश साकेत के इकलौते बेटे की भी कथित रूप से इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद भी झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सिहावल जनपद के कई गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अक्सर ताला लटका रहता है या डॉक्टर नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते। इसी का फायदा उठाकर झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम क्लीनिक चला रहे हैं और मरीजों से मनमानी फीस वसूल रहे हैं। कई मामलों में पैसे को लेकर विवाद और धमकी देने जैसी शिकायतें भी सामने आती रहती हैं।

प्रदेश स्तर पर शासन द्वारा झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्ती के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का असर कम ही दिखाई दे रहा है। सिहावल, हिनौती, सोनवर्षा पहाड़ी, खड़बड़ा, हटवा, कोदौरा, तितली, बड़ागांव, अमिलिया, सुडवार, सजवानी और लिलवार जैसे गांवों में झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय बताए जा रहे हैं।

इस संबंध में जब सिहावल क्षेत्र के स्वास्थ्य अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनसे सम्पर्क नहीं हो सका। इससे स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि लोगों की जान के साथ हो रहे खिलवाड़ पर रोक लग सके।

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