सीधी(ईन्यूज़ एमपी): जमोड़ी सेंगरान में शुक्रवार 20 फरवरी को रेडक्रॉस हॉस्पिटल भवन निर्माण का भूमिपूजन पूरे उत्साह और औपचारिकता के साथ संपन्न हुआ। मंच सजा, मालाएं चढ़ीं, भाषण हुए और जनहित के बड़े-बड़े संकल्प लिए गए। लेकिन कार्यक्रम का असली ‘हाइलाइट’ तब सामने आया जब शिलापट्ट पर उकेरी गई तारीख पर नजर गई—वहां 20 जनवरी 2026 अंकित था! यानी कार्यक्रम फरवरी में और पट्टिका जनवरी की। लगता है पीडब्ल्यूडी ने निर्माण से पहले टाइम मशीन का ट्रायल ही कर लिया...? कार्यक्रम में मौजूद सैकड़ों नजरों से यह चूक भले बच गई हो, लेकिन हमारी एक पैनी नजर ने जैसे ही शिलापट्टिका पढ़ी, सरकारी तंत्र की ‘सतर्कता’ उजागर हो गई। रेडक्रॉस हॉस्पिटल भवन का निर्माण लोक निर्माण विभाग (PWD) के माध्यम से कराया जा रहा है। परियोजना की टेंडर राशि 227.29 लाख रुपये तथा प्रशासनिक स्वीकृति 268.20 लाख रुपये की बताई गई है। निर्माण एनटीपीसी के सीएसआर मद से किया जाएगा। कार्यक्रम में सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने निर्माण एजेंसी और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को एक वर्ष के भीतर कार्य पूर्ण करने का अल्टीमेटम भी दे दिया। साथ ही कहा कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार जनहित में अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. श्याम सिंह कुमरे ने की। इसमें जमीनदाता मंजू सिंह सेंगर भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। लेकिन सवाल वही—जब शिलापट्टिका जैसी स्थायी चीज में ही इतनी बड़ी ‘तारीखी गड़बड़ी’ हो जाए तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भरोसा कैसे किया जाए? जिले में पीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्यों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं—घटिया निर्माण, देरी और कथित कमीशनखोरी की चर्चाएं आम रही हैं। ऐसे में यह शुरुआती लापरवाही भविष्य के निर्माण की झलक तो नहीं...? अब देखना यह होगा कि एक वर्ष में भवन खड़ा होता है या तारीखों की तरह समय भी आगे-पीछे होता रहेगा। फिलहाल तो जमोड़ी सेंगरान में भूमिपूजन के साथ एक बात तय हो गई—पीडब्ल्यूडी की घड़ी शायद जिले की घड़ी से थोड़ा अलग चल रही है।