सीधी(ईन्यूज एमपी)- जिले में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में इस बार वनांचल क्षेत्र कुशमी से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। सीधी के कलेक्ट्रेट में करीब छह पंचायतों के लगभग 400 ग्रामीण सरपंचों के नेतृत्व में एकत्र हुए और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे अपनी मातृभूमि छोड़कर नहीं जाएंगे और प्रशासन उन्हें सड़क, बिजली, पानी व आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए। संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र के गांवों का मुद्दा प्रदर्शनकारी ग्रामीण संजय टाइगर रिजर्व के भीतर बसे गांवों से आए थे। उनका कहना है कि बरसों से वे इसी क्षेत्र में निवास कर रहे हैं, जहां बैगा, गोंड़ और यादव समुदाय के हजारों लोग आबाद हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि करीब 50 हजार की आबादी वाले इस आदिवासी बहुल अंचल में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन सहमति से विस्थापन की बात करता है, लेकिन जो परिवार विस्थापित नहीं होना चाहते, उन्हें सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कुछ दलाल सक्रिय हैं, जो विस्थापन को जबरन थोपने की कोशिश कर रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं का संकट ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि गांवों में पक्के मकानों का अभाव है, आवागमन के लिए सड़कें नहीं हैं, बिजली व्यवस्था नगण्य है और पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है। शिक्षा व्यवस्था भी चिंताजनक है—पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों के लिए स्कूल उपलब्ध नहीं है, जिससे आगे की पढ़ाई बाधित हो रही है। दुबरी कला की सरपंच रानी बैगा ने कहा कि रास्ते न होने के कारण सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है और शादियों जैसे कार्यक्रम भी कठिन हो गए हैं। ग्राम डेवा के सरपंच हरिराम बैगा ने कहा कि जंगल ही उनका घर है और वे यहीं सुरक्षित महसूस करते हैं। सरपंचों की मौजूदगी प्रदर्शन में खैरी, डेवा, खरबर, उमरिया, चिंगवाह और दुबरी कला पंचायतों के सरपंच शामिल हुए। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रशासन से मांग की कि उन्हें मूलभूत सुविधाएं दी जाएं और विस्थापन के लिए दबाव न बनाया जाए।