नई दिल्ली(ईन्यूज एमपी)- देशभर में आज गुरुवार को बिजली क्षेत्र से जुड़े 27 लाख से अधिक कर्मचारी और इंजीनियर एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर हैं। पावर सेक्टर के निजीकरण, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025, प्रस्तावित राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 और बिजली कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली समेत विभिन्न मांगों को लेकर यह बड़ा आंदोलन किया जा रहा है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने बताया कि 12 फरवरी की यह हड़ताल आजाद भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाइयों में से एक बन सकती है। उन्होंने कहा कि पहली बार संयुक्त किसान मोर्चा और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने इस हड़ताल को समर्थन दिया है और बिजली कर्मचारियों के साथ एकजुटता दिखाई है। दुबे के अनुसार, बिजली कर्मचारी, इंजीनियर, मजदूर और किसान मिलकर इस आंदोलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए मैदान में उतरे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पावर सेक्टर में नियमित और स्थायी कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है, जिससे कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। हड़ताल की प्रमुख मांगों में आउटसोर्सिंग पर रोक, सीधी भर्ती के माध्यम से नियमित पदों को भरना और मौजूदा आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण शामिल है। एआईपीईएफ ने यह भी चिंता जताई है कि टीबीसीबी मॉडल के जरिए डिस्ट्रीब्यूशन, जेनरेशन और ट्रांसमिशन का निजीकरण गरीब उपभोक्ताओं, छोटे और मध्यम उद्योगों तथा आम जनता के हितों के खिलाफ है। संगठन ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 को तत्काल वापस लेने की मांग दोहराई है। दुबे ने देशभर के सभी बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों से हड़ताल में भाग लेकर एकता प्रदर्शित करने की अपील की है। इस बीच सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU), ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) और ऑल इंडिया एग्रीकल्चरल वर्कर्स यूनियन (AIAWU) ने भी आम हड़ताल का समर्थन किया है। इन संगठनों ने केंद्र सरकार पर जनविरोधी और मजदूर विरोधी नीतियां लागू करने का आरोप लगाया है। संगठनों का दावा है कि मनरेगा की जगह प्रस्तावित विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट 2025 लागू होने से अधिकार आधारित रोजगार गारंटी व्यवस्था समाप्त हो सकती है और आर्थिक जिम्मेदारी राज्यों पर स्थानांतरित हो जाएगी। इसके अलावा बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति, प्रस्तावित शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, मसौदा बीज विधेयक और बिजली संशोधन विधेयक को भी विभिन्न वर्गों के हितों के खिलाफ बताया गया है। आंदोलनकारी संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि शांति एक्ट के जरिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी और विदेशी कंपनियों के लिए खोलने की कोशिश की जा रही है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो सकते हैं। आज की इस हड़ताल के चलते कई राज्यों में बिजली सेवाओं पर आंशिक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस आंदोलन पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।