सीधी (ईन्यूज़ एमपी): अभी-अभी मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल सीधी परिसर में खड़ी एक एंबुलेंस में अचानक भीषण आग लग गई। घटना रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है। आग अस्पताल परिसर की बाउंड्री पर, मुख्य बिल्डिंग से महज 10 कदम की दूरी पर भड़की, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एंबुलेंस देखते ही देखते आग का गोला बन गई। अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में दहशत का माहौल बन गया। आग की लपटें अस्पताल भवन की ओर बढ़तीं उससे पहले हालात को संभालने की कोशिश की गई। अगर आग जरा भी फैलती तो जिला अस्पताल में भर्ती सैकड़ों मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती थी। जैसे ही घटना की सूचना कलेक्टर स्वारोचिष सोमवंशी तक पहुंची, उन्होंने तत्काल फायर ब्रिगेड को मौके पर भेजने के निर्देश दिए। प्रशासन की सक्रियता और मॉनिटरिंग के चलते आग पर काबू पाया गया और बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल इस घटना के बाद एसडीएम राकेश शुक्ल भी मामले की निगरानी में जुटे हैं और आग लगने के कारणों की गहन जांच कराई जा रही है। शॉर्ट सर्किट, तकनीकी खराबी या अन्य कारणों पर पड़ताल जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटनास्थल से चंद कदम की दूरी पर ही नगर पालिका परिषद सीधी का कार्यालय स्थित है। इसके बावजूद शुरुआत में अफरा-तफरी का माहौल रहा। सवाल उठ रहे हैं कि इतनी संवेदनशील जगह पर फायर सेफ्टी और निगरानी के क्या इंतजाम थे? खतरे की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस स्थान पर आग लगी, उसके ठीक ऊपर 33,000 केवी और 11,000 केवी की बिजली लाइनें तथा ट्रांसफार्मर लगे हुए थे। यानी एम्बुलेंस में लगी आग किसी भी पल विकराल रूप ले सकती थी और हाई वोल्टेज तारों को चपेट में लेकर पूरा इलाका अंधेरे और बड़े विस्फोट की चपेट में आ सकता था। फिलहाल एम्बुलेंस पूरी तरह जल चुकी है, लेकिन राहत की बात यह है कि कोई जनहानि नहीं हुई। यह एक बड़ी चूक साबित हो सकती थी, गनीमत रही कि आग अस्पताल भवन तक नहीं पहुंची। हालांकि इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं— अस्पताल परिसर में अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे? हाई वोल्टेज लाइन और ट्रांसफार्मर के नीचे वाहन खड़े करने की अनुमति कैसे दी गई? नगर पालिका कार्यालय पास होने के बावजूद शुरुआती हालात में समन्वय क्यों नहीं दिखा? जिला चिकित्सालय में घटी यह आगजनी महज एक वाहन के जलने की घटना नहीं, बल्कि शहर की आपात तैयारियों की कड़ी परीक्षा थी— जिसमें जिला प्रशासन की सक्रियता से बड़ा संकट तो टल गया पर भविष्य में पुनरावृत्ति से बंचना होगा ।