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सिंगरौली में ₹22 हजार करोड़ के निवेश की तैयारी! बिरला की सीएम मोहन से मुलाकात, विंध्य को बड़ी उम्मीद

भोपाल(ईन्यूज एमपी)-मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की संभावना है। आदित्य बिरला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के दौरान प्रदेश में औद्योगिक निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सिंगरौली जिले में समूह की कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज से जुड़ी परियोजनाओं के लिए करीब 22 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव की बात सामने आई है। यदि यह प्रस्ताव योजनाबद्ध तरीके से जमीन पर उतरता है, तो सिंगरौली सहित पूरे विंध्य क्षेत्र की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सकता है।
सिंगरौली पहले से ही ऊर्जा और खनिज आधारित उद्योगों के लिए जाना जाता है। यहां हिंडाल्को का महान एल्युमिनियम संयंत्र भी संचालित है। ऐसे में कंपनी की ओर से प्रस्तावित नया निवेश क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है।

हिंडाल्को, आदित्य बिरला समूह की प्रमुख धातु उत्पादक कंपनी है, जिसका कारोबार एल्युमिनियम, कॉपर और उनसे जुड़े औद्योगिक उत्पादों तक फैला हुआ है। कंपनी की उत्पादन क्षमता में विस्तार होने से प्रत्यक्ष रोजगार के साथ परिवहन, मशीनरी, निर्माण, रखरखाव और स्थानीय आपूर्ति से जुड़े कारोबारों को भी अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, प्रस्तावित परियोजना से कितनी नौकरियां पैदा होंगी, इसकी आधिकारिक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है।
हिंडाल्को ने फरवरी 2025 में मध्यप्रदेश में अगले दो वर्षों के दौरान करीब 15 हजार करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की थी। यह घोषणा भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान की गई थी। उस समय कंपनी ने महान एल्युमिनियम संयंत्र सहित प्रदेश में अपने औद्योगिक विस्तार की योजनाओं का उल्लेख किया था।
जुलाई 2026 में कंपनी के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला ने हिंडाल्को के लिए देशभर में संभावित रणनीतिक परियोजनाओं के तहत 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश पर विचार किए जाने की जानकारी भी दी थी। कंपनी की निवेश योजनाएं एल्युमिनियम और अन्य धातुओं की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं।

सिंगरौली में बड़े निवेश की परियोजना आगे बढ़ने पर इसके संभावित लाभ केवल उद्योग परिसर तक सीमित नहीं रहेंगे। निर्माण कार्यों से स्थानीय ठेकेदारों और श्रमिकों को काम मिल सकता है। परिवहन, खानपान, आवास, तकनीकी सेवाओं और छोटे कारोबारों की मांग बढ़ने की संभावना भी रहेगी।

स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिहाज से कौशल प्रशिक्षण और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही औद्योगिक विस्तार के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों और आसपास के गांवों पर पड़ने वाले प्रभावों का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उद्योगपतियों से मुलाकातों का उद्देश्य मध्यप्रदेश में नए निवेश आकर्षित करना और मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के विस्तार को प्रोत्साहित करना है। कुमार मंगलम बिरला के साथ हुई मुलाकात को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, ₹22 हजार करोड़ की परियोजना के संबंध में निवेश की अंतिम स्वीकृति, विस्तृत परियोजना योजना, निर्माण शुरू होने की समयसीमा और रोजगार के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में विंध्य क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी संभावना जरूर है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ परियोजना के क्रियान्वयन और स्थानीय लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।

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