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Home मध्य प्रदेश MP के सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण का नया मेनू जारी: बघेलखंड का पारंपरिक व्यंजन 'इंद्रहर' अब बच्चों की थाली में...

MP के सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण का नया मेनू जारी: बघेलखंड का पारंपरिक व्यंजन 'इंद्रहर' अब बच्चों की थाली में...

भोपाल(ईन्यूज़ एमपी)- मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को अब मध्याह्न भोजन (PM पोषण) में अधिक विविधता, स्वाद और पोषण मिलेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को आदेश जारी कर स्कूलों के साप्ताहिक मेनू का पुनर्निरूपण करने के निर्देश दिए हैं।

इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रदेश की समृद्ध स्थानीय खाद्य संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों को स्कूल के भोजन में शामिल किया गया है।


नई गाइडलाइन के अनुसार, सप्ताह में कम से कम एक दिन बच्चों को क्षेत्रीय और पारंपरिक पोषक व्यंजन परोसे जाएंगे। इसी कड़ी में बघेलखंड और महाकौशल क्षेत्र के प्रमुख व प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन 'इंद्रहर' व कोदौ-कुटकी की खीर को मध्याह्न भोजन के मेनू में खास तौर पर शामिल करने का निर्णय लिया गया है।

इंद्रहर विभिन्न प्रकार की दालों (दालों के मिश्रण) से तैयार किया जाने वाला अत्यंत स्वादिष्ट और प्रोटीन से भरपूर पारंपरिक व्यंजन है।


प्रदेश के अन्य सांस्कृतिक क्षेत्रों के बच्चों को भी उनके स्थानीय स्वाद के अनुसार भोजन दिया जाएगा:

* मालवा एवं भोपाल-नर्मदापुरम: दाल-बाफला, भुट्टे का कीस और गेहूं की लापसी।

* बुंदेलखंड: महरिया, बेसन के चीले और दाल-बाटी।

* ग्वालियर-चंबल: बाजरे की राबड़ी, बेड़ई और बाजरा-ज्वार की रोटी।

* जनजातीय क्षेत्र (झाबुआ, अलीराजपुर, मंडला, डिंडौरी): महुआ-अलसी के लड्डू, कोदो-कुटकी की खीर और खिचड़ी।

भारत सरकार की 2022 की गाइडलाइन के आधार पर तय किए गए पोषण मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा जिसमें प्राथमिक शाला (कक्षा 1 से 5) के प्रति विद्यार्थी को प्रतिदिन 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं माध्यमिक शाला (कक्षा 6 से 8) के प्रति विद्यार्थी को प्रतिदिन 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन निर्धारित किया गया है।


मेनू में मौसमी सब्जियों (जैसे कद्दू, लौकी, भिंडी, तोरई) के साथ-साथ सप्ताह में कम से कम दो बार पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई और मुनगा (सहजन) जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों का उपयोग अनिवार्य किया गया है। आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए भोजन में टमाटर या नींबू की खटाई जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, स्थानीय फलों और दूध-छाछ जैसे उत्पादों को भी शामिल करने पर जोर दिया गया है।

जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति स्थानीय परिस्थितियों, खाद्य उपलब्धता और बच्चों की पसंद का आकलन कर एक माह के भीतर जिलेवार नया मेनू लागू करेगी। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और एकरूपता बनाए रखने के लिए मानकीकृत रेसिपी पुस्तिका तैयार कर स्कूलों को उपलब्ध कराई जाएगी।

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