भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश में सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के नामांकन में लगातार गिरावट का बड़ा खुलासा हुआ है। विधानसभा में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में कक्षा 1 से 12 तक लगभग 78 लाख विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है, जबकि पिछले 6 वर्षों (2020-21 से 2026-27) के दौरान ही करीब 28 लाख विद्यार्थियों का नामांकन घट गया है। इसके साथ ही राज्य में सरकारी विद्यालयों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। विधानसभा में विधायक श्रीप्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में स्कूल शिक्षा विभाग ने यह जानकारी उपलब्ध कराई। विभाग ने विभिन्न परिशिष्टों के माध्यम से वर्षवार विद्यालयों और विद्यार्थियों के आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। सरकारी स्कूलों की संख्या में भी बड़ी कमी विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 1,14,237 से घटकर 81,663 रह गई है।** यानी इस अवधि में 32,574 शासकीय विद्यालय कम हो गए। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। 6 साल में 28 लाख विद्यार्थियों की कमी स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2026-27 के बीच कक्षा 1 से 12 तक सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या में लगभग 28 लाख की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं पिछले 15 वर्षों में यह कमी करीब 78 लाख विद्यार्थियों तक पहुंच गई है। विधानसभा में सरकार का जवाब स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की ओर से विधानसभा में दिए गए लिखित उत्तर में बताया गया कि विस्तृत आंकड़े प्रश्न के साथ संलग्न परिशिष्टों में उपलब्ध हैं। वहीं कक्षा 1 से 12 तक नामांकन में आई कमी को लेकर तैयार कराई गई विश्लेषणात्मक रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। कई अन्य जानकारियां भी मांगी गईं विधायक द्वारा पूछे गए प्रश्न में सरकारी एवं निजी विद्यालयों में नामांकन, विद्यालयों की संख्या, नियमित एवं अतिथि शिक्षकों की स्थिति, रिक्त पद, जर्जर भवन, खेल मैदान, शौचालय, टेम्पलेट, बाउंड्री वॉल और खेल शिक्षकों की उपलब्धता जैसी जानकारियां भी मांगी गई थीं। विभाग ने इनमें से अधिकांश जानकारियां अलग-अलग परिशिष्टों में उपलब्ध होने की बात कही है। सरकारी आंकड़ों के सामने आने के बाद प्रदेश में सरकारी स्कूलों में लगातार घटते नामांकन और विद्यालयों की संख्या को लेकर शिक्षा व्यवस्था पर नई बहस शुरू होने की संभावना है।