भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश में हाल ही में 29 आईएएस अधिकारियों के तबादलों के बाद अब एक और बड़े प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार प्रदेश के 3 प्रमुख सचिव (पीएस), 2 संभागायुक्त और 10 कलेक्टरों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। इनमें अधिकांश अधिकारी लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत हैं, जबकि कुछ अधिकारी स्वयं नई पदस्थापना की कोशिशों में जुटे बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा तथा सामाजिक न्याय विभाग की प्रमुख सचिव सोनाली पोंकशे वायंगंकर के विभागों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय में भी नए सिरे से जमावट की चर्चा है। हाल ही में मुख्यमंत्री के सचिव आलोक सिंह को आईजी पंजीयन के पद पर भेजा गया है, जिसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय में नई नियुक्तियों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि बीते बुधवार राज्य सरकार ने 29 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए थे। इस सूची में कई अधिकारियों से अतिरिक्त प्रभार भी वापस लिए गए थे। अब प्रशासनिक गलियारों में अगले चरण के फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इधर, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रबंध संचालक माल सिंह जून माह में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, जबकि पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव जुलाई में सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में उनके पास मौजूद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां अन्य अधिकारियों को सौंपी जानी हैं। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी बदलने की चर्चा संभागायुक्त * मनोज खत्री – ग्वालियर संभाग * सुरभि गुप्ता – शहडोल संभाग प्रमुख सचिव * अमित राठौर – वाणिज्यिक कर * गुलशन बामरा – जनजातीय कार्य * सोनाली पोंकशे वायंगंकर – सामाजिक न्याय इन कलेक्टरों के तबादले की अटकलें * रुचिका चौहान – ग्वालियर * केदार सिंह – शहडोल * गिरीश मिश्रा – राजगढ़ * रिजू बाफना – शाजापुर * अदिति गर्ग – मंदसौर * पार्थ जायसवाल – छतरपुर * मृणाल मीना – बालाघाट * हर्षल पंचोली – अनूपपुर * हिमांशु चंद्रा – नीमच * किरोड़ीलाल मीना – भिंड तबादलों के खिलाफ बढ़ सकती हैं याचिकाएं तबादलों के बाद बड़ी संख्या में शासकीय सेवकों द्वारा न्यायालय की शरण लेने की संभावना को देखते हुए कई विभागों ने पहले से ही हाईकोर्ट जबलपुर और उसकी खंडपीठों में केविएट दायर कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में तबादला आदेशों को चुनौती दी जाती है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। केविएट दाखिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थगन आदेश से पहले विभाग का पक्ष भी सुना जा सके।