भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में मनचाहे स्थानांतरण का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया 19 जून से शुरू होने जा रही है। विभाग द्वारा 23 जून तक स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, लेकिन नई शर्तों को लेकर शिक्षकों और शिक्षक संगठनों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि बनाए गए नियम इतने सख्त हैं कि बड़ी संख्या में शिक्षक आवेदन करने से ही वंचित हो जाएंगे। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने दावा किया है कि वर्तमान नियमों के कारण प्रदेश के लगभग 95 प्रतिशत शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया का लाभ नहीं ले सकेंगे। संगठन ने सरकार से नियमों में संशोधन कर राहत देने की मांग की है। तीन प्रमुख शर्तों पर सबसे ज्यादा आपत्ति तबादला नीति में सबसे अधिक विरोध 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को लेकर हो रहा है। शिक्षकों का कहना है कि कई ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे अनेक शिक्षकों की उपस्थिति निर्धारित मानक से कम रह गई है। दूसरी बड़ी शर्त जनगणना ड्यूटी से जुड़ी है। वर्तमान में प्रदेश के बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना कार्य में लगे हुए हैं। विभागीय निर्देशों के अनुसार जनगणना ड्यूटी में संलग्न शिक्षकों के स्थानांतरण नहीं किए जाएंगे। यहां तक कि पहले से जारी प्रशासनिक तबादला आदेश भी प्रभावहीन माने जा सकते हैं। तीसरी शर्त के तहत केवल वही शिक्षक आवेदन कर सकेंगे जिनकी सेवा अवधि तीन वर्ष या उससे अधिक पूर्ण हो चुकी है। तीन वर्ष से कम सेवा वाले शिक्षक इस प्रक्रिया से बाहर रहेंगे। 4.25 लाख शिक्षकों पर असर प्रदेश में लगभग 4.25 लाख शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें करीब 1.75 लाख प्राथमिक शिक्षक, 1.50 लाख माध्यमिक शिक्षक और लगभग 1 लाख उच्च माध्यमिक शिक्षक (व्याख्याता) शामिल हैं। पारिवारिक, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत कारणों से वर्षों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षक नई शर्तों से निराश बताए जा रहे हैं। किन शिक्षकों के नहीं होंगे तबादले * जिनकी ड्यूटी जनगणना कार्य में लगी हुई है। * जिनकी सेवा अवधि तीन वर्ष से कम है। * जिनकी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम है। * जिनकी सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय शेष है। * जिनका गृह जिला और वर्तमान पदस्थापना जिला एक ही है। हालांकि विभाग ने अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता महिलाओं तथा स्वयं या पति-पत्नी की गंभीर बीमारी जैसी विशेष परिस्थितियों में गृह जिले या सुविधाजनक स्थान पर पदस्थापना पर विचार करने का प्रावधान रखा है। सरकार से नियमों में राहत की मांग शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी और तीन वर्ष की सेवा अवधि जैसी शर्तों में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाए। उनका कहना है कि यदि नियमों में लचीलापन नहीं बरता गया तो बड़ी संख्या में शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर रह जाएंगे और स्वैच्छिक तबादला व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। 19 जून से शुरू होने वाली ऑनलाइन प्रक्रिया पर अब पूरे प्रदेश के शिक्षकों की नजरें टिकी हैं। शिक्षक संगठनों का मानना है कि सरकार अंतिम समय में कुछ राहत देती है तो हजारों शिक्षकों को इसका लाभ मिल सकता है।