भोपाल(ईन्यूज एमपी)- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के स्थानांतरण की समय-सीमा एक दिन के लिए बढ़ाने सहित इंदौर मेट्रो परियोजना की संशोधित लागत, स्वास्थ्य सेवाओं में निजी भागीदारी और चिकित्सा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। आज रात 12 बजे तक जारी हो सकेंगे तबादला आदेश कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों की अंतिम तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया गया। अब विभाग आज रात 12 बजे तक स्थानांतरण आदेश जारी कर सकेंगे। इससे पहले सरकार ने स्थानांतरण की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की थी। समय-सीमा बढ़ने से विभिन्न विभागों में लंबित तबादला प्रकरणों के निपटारे का रास्ता साफ हो गया है। इंदौर मेट्रो की लागत बढ़कर पहुंची 12,900 करोड़ रुपये बैठक में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत को भी स्वीकृति प्रदान की गई। वर्ष 2017 में इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,515 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, लेकिन एलाइनमेंट में बदलाव और कुछ हिस्सों को अंडरग्राउंड किए जाने के कारण परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 12,900 करोड़ रुपये हो गई है। करीब 31 किलोमीटर लंबे इंदौर मेट्रो नेटवर्क के लिए पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। सरकार का मानना है कि परियोजना के पूर्ण होने से इंदौर शहर की यातायात व्यवस्था को नई गति मिलेगी और नागरिकों को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। जबलपुर में होगा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम कैबिनेट बैठक में जानकारी दी गई कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम जबलपुर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। रीवा, देवास और गुना में निजी भागीदारी से संचालित होंगे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक नई पायलट परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत रीवा, देवास और गुना जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन निजी भागीदारी मॉडल पर किया जाएगा। सरकार का कहना है कि 20 बिस्तरों से अधिक क्षमता वाले कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्टाफ की कमी देखी गई है। ऐसे में निजी एजेंसियां डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य संसाधनों की व्यवस्था कर अस्पतालों का संचालन करेंगी। हालांकि अस्पतालों की परिसंपत्तियां सरकार के स्वामित्व में ही रहेंगी तथा दवाइयों की उपलब्धता भी शासन द्वारा सुनिश्चित की जाएगी। संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी और न्यूनतम लागत पर बेहतर सेवाएं देने वाले संस्थान को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। परोपकारी संस्थाओं को अस्पताल स्थापना के लिए मिलेगी जमीन कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि यदि कोई परोपकारी या कल्याणकारी संस्था मध्यप्रदेश में चिकित्सालय स्थापित करना चाहती है, तो सरकार उसे भूमि उपलब्ध कराएगी। साथ ही सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और मशीनों हेतु पूंजीगत अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। पांच मंत्रियों की समिति करेगी मापदंड तय स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी भागीदारी की नई व्यवस्था के लिए सरकार ने पांच मंत्रियों की एक समिति गठित की है। यह समिति पूरी योजना के मापदंड, संचालन प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था तय करेगी। समिति में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, मंत्री राकेश सिंह, चेतन्य काश्यप, नरेंद्र शिवाजी पटेल तथा राधा सिंह को शामिल किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन केंद्रों में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को उपचार की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। कैबिनेट के इन निर्णयों को प्रदेश में प्रशासनिक सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और अधोसंरचना विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।